प्रयागराज: सेवलाइफ फाउंडेशन (एसएलएफ) ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड के सहयोग से कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जेबीएस पब्लिक स्कूल, प्रयागराज में ‘स्कूल ज़ोन सेफ्टी ट्रीटमेंट’ का शुभारंभ किया है। इस परियोजना के तहत एसएलएफ ने विभिन्न भागीदारों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर सुरक्षा उपायों की समीक्षा के लिए ‘सेफ्टी वॉकथ्रू’ का भी आयोजन किया।
ज़ीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट (जैडएफडी) प्रोग्राम का हिस्सा
जेबीएस पब्लिक स्कूल में किया गया यह ट्रीटमेंट प्रयागराज में चल रहे ‘ज़ीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट’ प्रोग्राम की नवीनतम कड़ी है। सड़क परिवहन एवं उच्च मार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सहयोग से विकसित इस प्रोग्राम को देश के 100 सबसे जोखिम वाले जिलों में लागू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य डेटा और वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य पर लाना है। यह प्रोग्राम इंजीनियरिंग सुधार, सख्त नियमन, आपातकालीन सेवाओं और सामुदायिक क्षमता विकास पर केंद्रित है।
चिन्हित खतरे और वैज्ञानिक समाधान
रीवा रोड (NH-30) पर स्थित इस स्कूल के पास सुरक्षा ऑडिट के दौरान कई गंभीर कमियां पाई गईं, जैसे स्कूल साइनेज का न होना, बेलगाम ट्रैफिक, रोशनी की कमी, असुरक्षित क्रॉसिंग और पैदल पथ का अभाव। इन खतरों को दूर करने के लिए टाटा एआईजी के सहयोग से एक विशेष ‘इंजीनियरिंग ट्रीटमेंट पैकेज’ तैयार किया गया है।
इसमें वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए रंबल स्ट्रिप्स, हॉरिजॉन्टल मार्किंग और ‘व्हीकल एक्टिवेटेड स्पीड साइन’ (VASS) लगाए गए हैं, जो तेज रफ्तार गाड़ी को देखते ही अलर्ट डिस्प्ले करते हैं। साथ ही, बच्चों के लिए सुरक्षित पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ जोन, साइकिल लेन और पैदल पथ बनाए गए हैं, जिन्हें मुख्य सड़क से अलग रखने के लिए बोलार्ड्स का इस्तेमाल किया गया है।
पुलिस अधिकारियों को मिली क्रैश इन्वेस्टिगेशन ट्रेनिंग
सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ पुलिस की क्षमता बढ़ाने के लिए उसी दिन एक ‘क्रैश इन्वेस्टिगेशन ट्रेनिंग सेशन’ आयोजित किया गया। इसमें क्रिटिकल कॉरिडोर पुलिस टीम के 60 अधिकारियों ने भाग लिया। इस ट्रेनिंग का मकसद दुर्घटना स्थल का वैज्ञानिक आकलन करना और साक्ष्यों के आधार पर दुर्घटना के पीछे के मानवीय व पर्यावरणीय कारणों का विश्लेषण करना है।
अधिकारियों और विशेषज्ञों के विचार
प्रयागराज के ट्रैफिक डीसीपी नीरज कुमार पांडे ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “स्कूल क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वैज्ञानिक और सामुदायिक भागीदारी से किया गया यह सुधार प्रयागराज को रोड सेफ्टी में मॉडल डिस्ट्रिक्ट बनाने के हमारे संकल्प को मजबूत करता है।”
टाटा एआईजी के वाइस प्रेसिडेंट (सीएसआर) देवांग पंड्या ने कहा, “सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है। हम उत्तर प्रदेश में लोगों की जान बचाने और एक सशक्त समुदाय बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” वहीं, सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक पीयूष तिवारी ने बताया कि स्कूल आने वाला हर बच्चा सुरक्षा का हकदार है और यह मॉडल भविष्य में रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।
गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2025 में जसरा और चाका के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को ट्रॉमा स्टेबिलाइज़ेशन फैसिलिटी के रूप में अपग्रेड किया जा चुका है, ताकि दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ में मरीजों को तत्काल इलाज मिल सके।
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