वाराणसी/प्रयागराज: जोशीमठ के 46वें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने अदालत की शरण ली है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच इस संवेदनशील मामले पर दोपहर बाद सुनवाई करेगी।
आरोपों को बताया ‘सत्ता का षड्यंत्र’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज जांच के दौरान पुलिस के साथ क्यों मौजूद हैं? स्वामी का दावा है कि जिस 17 जनवरी की घटना का जिक्र किया जा रहा है, वह पूरी तरह झूठी है और इसके सबूत वे अदालत में पेश करेंगे।
सरकार और मुख्यमंत्री पर सीधा हमला
अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने के बाद शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में ‘बुलडोजर संस्कृति’ और अहंकार के जरिए आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जब एक शंकराचार्य के खिलाफ बिना ठोस सबूतों के ऐसी कार्रवाई हो सकती है, तो आम साधु-संतों की सुरक्षा का क्या होगा?”
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
यह मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक भी पहुँच गया है। डीके फाउंडेशन की शिकायत पर आयोग ने केस दर्ज कर लिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक हिस्ट्रीशीटर की तहरीर पर पुलिस की शक्ति का दुरुपयोग कर शंकराचार्य की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि प्रयागराज के झूंसी थाने में 21 फरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और अन्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाने और विवेचना जारी रहने तक राहत पाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
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