आगरा: आगरा जनपद की जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने जनपद में बढ़ते वायु प्रदूषण और गिरते भूजल स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राजस्थान की ओर से आने वाली धूल भरी हवाएं फतेहपुर सीकरी के रास्ते आगरा में प्रवेश कर रही हैं, जो न केवल ताजमहल की चमक फीकी कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनस्वास्थ्य के लिए भी ‘साइलेंट किलर’ साबित हो रही हैं।
सिंचाई मंत्री से बांधों के जीर्णोद्धार की मांग
डॉ. भदौरिया ने प्रदेश के सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव को पत्र लिखकर तेहरा मोरी बांध की तत्काल मरम्मत कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि खारी नदी पर बना यह ऐतिहासिक बांध सदियों से मानसून के पानी को संचित करता रहा है। इसके सक्रिय होने से पूरे ब्लॉक में भूजल स्तर सुधरेगा और धूल कणों (SPM) को आगे बढ़ने से रोका जा सकेगा।
खनुआ बांध: उटंगन नदी की लाइफलाइन
जिला पंचायत अध्यक्ष ने खनुआ बांध का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह 22 वर्ग किमी का विशाल बांध उटंगन नदी का मुख्य स्रोत है। राजस्थान द्वारा पानी रोके जाने के कारण यह सूख रहा है। उन्होंने मंडलायुक्त (अध्यक्ष, TTZ) से अनुरोध किया है कि राजस्थान सरकार से वार्ता कर इसमें न्यूनतम जलस्तर सुनिश्चित किया जाए ताकि ताज ट्रिपेजियम जोन (TTZ) में हरियाली बनी रहे।
जनस्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
कैंप ऑफिस पर सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए डॉ. मंजू भदौरिया ने कहा, “अगर हवा में 2.5 माइक्रोन (μg/m^3) आकार के सूक्ष्म कण मौजूद हैं, तो यह सीधे फेफड़ों पर हमला करते हैं। आगरा के प्रवेश द्वार (फतेहपुर सीकरी, अछनेरा, अकोला) पर ही इन कणों को रोकना अनिवार्य है।”
ASI और सिविल सोसायटी का रुख
सिविल सोसायटी के सचिव अनिल शर्मा ने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) तेहरा मोरी बांध के संरक्षण कार्य के लिए अनुमति देने को तैयार है। प्रतिनिधिमंडल में राजीव सक्सेना और असलम सलीमी ने भी भूजल रिचार्ज और हरियाली के लिए इन जल संरचनाओं को सुचारू करने पर जोर दिया।
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