आगरा में यूपी बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने की मांग: 27 वर्षों की जिद अब निर्णायक मोड़ पर

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आगरा में यूपी बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने की मांग ने पकड़ी रफ्तार, 27 वर्षों की जिद अब निर्णायक मोड़ पर

आगरा से उठी पुरानी आवाज

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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.

आगरा। आगरा में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित कराने की 27 वर्ष पुरानी मांग एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सामने आ गई है। लंबे समय से लंबित इस मांग को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है, जिससे विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों में नई उम्मीद जगी है।

जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपा गया ज्ञापन

मंगलवार को इस आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए संघर्ष समिति के संयोजक
डॉ. देवी सिंह नरवार ने
जिला विद्यालय निरीक्षक (बालिका शिक्षा) विश्व प्रताप सिंह को औपचारिक ज्ञापन सौंपा।
इस ज्ञापन में आगरा में यूपी बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय खोले जाने की आवश्यकता, औचित्य और इससे होने वाले व्यापक लाभों का विस्तार से उल्लेख किया गया।

शिक्षा निदेशक को जाएगी संस्तुति सहित रिपोर्ट

जिला विद्यालय निरीक्षक विश्व प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि ज्ञापन के आधार पर
शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को शीघ्र ही
संस्तुति सहित पत्र भेजा जाएगा, ताकि आगरा में क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना के प्रस्ताव पर शासन स्तर पर ठोस और निर्णायक कार्रवाई हो सके।

1999 से जारी है संघर्ष, नहीं टूटा संकल्प

बिचपुरी के कलवारी स्थित एचआर एस्टेट निवासी
डॉ. देवी सिंह नरवार ने बताया कि वह वर्ष
1999 से लगातार इस मुद्दे को शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष उठाते आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1999, 2001 और 2018 में तीन बार शासन को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।

56 लाख परीक्षार्थी, केवल पांच क्षेत्रीय कार्यालय

वर्तमान में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्रतिवर्ष लगभग
56 लाख छात्र-छात्राएं हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा में शामिल होते हैं,
जबकि पूरे प्रदेश में बोर्ड के मात्र
पांच क्षेत्रीय कार्यालय
मेरठ, वाराणसी, बरेली, प्रयागराज और गोरखपुर में ही संचालित हैं।
यह स्थिति प्रशासनिक बोझ और छात्रों की परेशानियों को लगातार बढ़ा रही है।

15 जिलों के लाखों विद्यार्थियों को सीधा लाभ

प्रस्तावित आगरा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत
आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, औरैया, कन्नौज, फर्रूखाबाद, इटावा, झांसी, जालौन (उरई) और ललितपुर
जिलों को शामिल किया जाना प्रस्तावित है।
इससे परीक्षा, आवेदन, अंकपत्र संशोधन, प्रमाणपत्र एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों में छात्रों को भारी राहत मिलेगी।

एक लाख से अधिक समर्थन पत्र, जनप्रतिनिधि भी साथ

संघर्ष समिति अब तक
एक लाख से अधिक छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों के हस्ताक्षर एकत्र कर चुकी है।
इसके अतिरिक्त अनेक सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने
मुख्यमंत्री को समर्थन पत्र भेजकर इस मांग को मजबूती प्रदान की है।

डायट परिसर में भवन प्रस्ताव, निरीक्षण भी पूर्ण

आगरा के डायट परिसर में स्थित
पुराने बीटीसी छात्रावास के 30 कमरे
क्षेत्रीय कार्यालय के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।
इस भवन का शासन स्तर पर निरीक्षण भी पूरा हो चुका है, जिससे प्रस्ताव की व्यवहारिकता सिद्ध होती है।

संपादकीय

डॉ. देवी सिंह नरवार का यह संघर्ष केवल एक कार्यालय की मांग नहीं है,
बल्कि यह शिक्षा के विकेंद्रीकरण, प्रशासनिक सुगमता और छात्र हित की सशक्त लड़ाई है।
27 वर्षों तक लगातार, शांतिपूर्ण और तथ्यात्मक प्रयास करते रहना असाधारण धैर्य, प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता का प्रमाण है।

आज जब अधिकतर आंदोलन कुछ दिनों में ठंडे पड़ जाते हैं,
डॉ. नरवार का सतत प्रयास यह बताता है कि
सच्चे जनहित के मुद्दे समय नहीं, संकल्प मांगते हैं।
उन्होंने न केवल शासन को प्रस्ताव दिए, बल्कि समाज को भी जोड़ा,
छात्रों की आवाज बने और शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई सामने रखी।

यदि आगरा में यूपी बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित होता है,
तो इसका श्रेय केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को नहीं,
बल्कि डॉ. देवी सिंह नरवार जैसे जमीनी शिक्षाविद् और संघर्षशील नागरिक को भी जाएगा।
यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए
एक प्रेरणादायी अध्याय बनकर इतिहास में दर्ज होगा।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

 

Dr. Bhanu Pratap Singh