लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सियासी रणनीति पर सीधा असर डाला है। बिहार में एनडीए की जीत और महिलाओं के रिकॉर्ड मतदान को देखते हुए अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में नए राजनीतिक समीकरण साधने की तैयारी शुरू कर दी है। सपा अध्यक्ष ने आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों में पार्टी को मजबूती देने के लिए अब ‘आधी आबादी’ को अपनी राजनीति के केंद्र में रख लिया है।
बिहार में नीतीश कुमार की सरकार की वापसी का श्रेय बड़ी संख्या में महिला वोटरों की सक्रियता को दिया गया। इसी रणनीति को अपनाते हुए सपा प्रमुख ने भी यूपी की महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर जोर बढ़ा दिया है। संसद में सपा की महिला सांसदों की बढ़ती उपस्थिति को अखिलेश एक बड़ा संदेश बताते हुए इसे महिलाओं के सशक्त प्रतिनिधित्व का उदाहरण मान रहे हैं।
बुधवार को अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर करते हुए लिखा—
“संसद में पीडीए का परचम लहरातीं सपा की ज़िम्मेदार जन प्रतिनिधि। नारी शक्ति का विकास कहने से नहीं, उन्हें सच्चा प्रतिनिधित्व देने से ही होगा। पीडीए में ‘आधी आबादी’ के रूप में शामिल हर स्त्री का सम्मान और समृद्धि हमारा संकल्प है।”
उन्होंने आगे कहा कि पीडीए में ‘A’ का मतलब ‘आधी आबादी’ है। सपा अब जल्द ही ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ लेकर आएगी, जिसके तहत बच्चियों, युवतियों और महिलाओं को सामाजिक तथा आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। अखिलेश ने कहा कि यह योजना उत्तर प्रदेश की उन्नति के उनके संकल्प को और मजबूत करेगी।
सपा की नई रणनीति आने वाले चुनावों में राजनीतिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करेगी, इस पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।
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