- नोशनल वेतनवृद्धि प्रकरणों में नवप्रभात: डॉ. देवी सिंह नरवार की पहल से शिक्षकों में उमंग
शिक्षा जगत में राहत की किरण
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
आगरा। लंबे समय से लंबित चले आ रहे अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की प्रदेश कार्यसमिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने आगरा मंडल के उपशिक्षा निदेशक (माध्यमिक) श्री मनोज कुमार गिरि से भेंट कर नोशनल वेतनवृद्धि के लंबित प्रकरणों का निस्तारण प्रारम्भ करा दिया है।
सेवानिवृत्त शिक्षकों को मिला सम्मानजनक अधिकार
आगरा जनपद के पात्र पेंशनर्स को नोशनल वेतनवृद्धि का लाभ प्रदान कर आदेश निर्गत किये गये हैं। इनमें साकेत इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य ओमप्रकाश शर्मा, प्रवक्ता डॉ. कामेन्द्र शर्मा, ओमप्रकाश जैन, स्वामी लीलाशाह आदर्श सिंधी इंटर कॉलेज, शाहगंज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. देवी सिंह नरवार, डी.सी. वैदिक इंटर कॉलेज, शाहगंज के श्री रामवीर सिंह वर्मा तथा एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत के प्रवक्ता श्री महेश चंद शर्मा शामिल हैं।
इस निर्णय से शिक्षकों में नई ऊर्जा और आत्मसम्मान पुनर्जीवित हुआ है।
मंडल स्तर पर तेजी से निस्तारण
उपशिक्षा निदेशक श्री मनोज कुमार गिरि के अनुसार अब तक मथुरा के 40, फिरोजाबाद के 25 और मैनपुरी के 15 प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है।
संबंधित विद्यालयों से निर्धारित प्रारूप पर आवेदन प्रबंधक या प्रधानाचार्य द्वारा अग्रसारित कर, 10 रुपये के नोटरी शपथपत्र के साथ जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा किये जा रहे हैं।
प्रयत्नशीलता की मिसाल बने डॉ. नरवार
डॉ. नरवार ने जिला विद्यालय निरीक्षक-एक श्री चंद्रशेखर और जिला विद्यालय निरीक्षक-दो (बालिका शिक्षा) श्री विश्व प्रताप सिंह से भी भेंटकर स्पष्ट किया कि सभी लंबित प्रकरण त्वरित गति से मंडलीय कार्यालय को भेजे जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि जो प्रधानाचार्य समय से प्रकरण नहीं भेजेंगे, उनके वेतन रोकने की कार्यवाही की जाएगी।
शिक्षकों में उम्मीद की नई लहर
नोशनल वेतनवृद्धि के इस अभियान ने बुजुर्ग शिक्षकों के जीवन में न्याय और सम्मान की अनुभूति को पुनर्स्थापित किया है। आगरा मंडल के शिक्षित समाज में डॉ. देवी सिंह नरवार की सक्रियता की व्यापक चर्चा हो रही है।
संपादकीय: शिक्षा सेवा के अर्थ को पुनर्परिभाषित करते डॉ. देवी सिंह नरवार
भारत के शिक्षा क्षेत्र में जब-जब जमीनी स्तर पर कोई सकारात्मक परिवर्तन हुआ, उसके पीछे किसी न किसी समर्पित शिक्षाविद का श्रम और संवेदनशीलता रही है। डॉ. देवी सिंह नरवार उन्हीं विरले शिक्षाविदों में हैं, जिन्होंने केवल मंचीय वक्तृत्व तक सीमित न रहते हुए नीति और प्रशासन के स्तर पर काम किया है।
उनकी पहल से नोशनल वेतनवृद्धि के हजारों पात्र पेंशनर्स को वह मान्यता मिलने जा रही है, जिसका वे वर्षों से इंतजार कर रहे थे। यह न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, बल्कि शिक्षक सम्मान की पुनर्प्रतिष्ठा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
शिक्षा क्षेत्र में डॉ. नरवार का यह योगदान समाज को यह संदेश देता है कि सेवा केवल कार्यकाल तक सीमित नहीं होती, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी जिम्मेदारी का एक नया अध्याय शुरू होता है। उन्होंने दिखा दिया है कि यदि नीयत पारदर्शी हो और उद्देश्य जनहित से प्रेरित, तो कोई भी प्रणाली अकर्मण्य नहीं रह सकती।
आज का यह प्रयास न केवल सेवानिवृत्त शिक्षकों के चेहरे पर मुस्कान लाया है, बल्कि यह भाव भी सशक्त किया है कि शिक्षा जगत में अभी भी ऐसे प्रहरी मौजूद हैं जो अपने साथियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। डॉ. नरवार का यह योगदान आने वाले समय में शिक्षाविदों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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