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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.
आगरा। 5 अगस्त को शहर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में छावनी परिषद के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ। विशाल जुलूस, बापू के सम्मान में गूंजते नारे और धरना—इन सबके बीच कांग्रेसियों ने छावनी परिषद के कार्यालय अधीक्षक को मांगपत्र सौंपा।
मुख्य मांगें इस प्रकार रहीं:
- वार्ड नंबर-6 सुल्तानपुरा स्थित एन.सी. वैदिक इंटर कॉलेज के सामने जीर्ण-शीर्ण गांधी प्रतिमा की मरम्मत।
- बापू वाटिका में टूटी हुई प्रतिमा का पुनर्निर्माण।
- क्षतिग्रस्त सार्वजनिक शौचालयों के 14 फुट गहरे सीवर टैंकों की मरम्मत एवं निर्माण।
- शहरभर के सभी सार्वजनिक शौचालयों में प्रकाश व पानी की व्यवस्था दुरुस्त करना।
- वार्ड नंबर-8 लालकुर्ती 411 आर्मी गेट पर नाले से जलभराव की समस्या का समाधान।
गांधी प्रतिमा व शौचालय की बदहाली पर आक्रोश
ज्ञापन में कहा गया कि गांधी प्रतिमा के आसपास का शौचालय और सीवर टैंक खस्ताहाल है। टूटे हुए ढांचे से लगातार बदबू और गंदगी फैल रही है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा है। पार्क में खेलते बच्चों के लिए भी यह स्थान हादसे की आशंका से भरा हुआ है।

बापू वाटिका और वार्डों में अव्यवस्था
बड़ी बस्ती स्थित बापू वाटिका की प्रतिमा भी टूटी हुई है, वहीं पास का सार्वजनिक शौचालय का सीवर टैंक बेहद खतरनाक स्थिति में है। साथ ही, वार्ड नंबर-1 से वार्ड नंबर-8 तक के सभी सार्वजनिक शौचालयों में लाइट और पानी की व्यवस्था सुधारने की अपील की गई।
नेताओं की मौजूदगी और जनसमर्थन
कैंटोनमेंट कार्यालय अधीक्षक कुलविंदर सिंह को सौंपे गए इस ज्ञापन में ये प्रमुख नेता व नागरिक मौजूद रहे:
पूर्व प्रवक्ता अनिल शर्मा
पूर्व शहर अध्यक्ष देवेंद्र कुमार चिल्लू
मनोज जैन बोहरा
मधुराम शर्मा
लक्ष्मी नारायण
अनुज शिवहरे
सचिन चौधरी
अजहर वारसी
सत्येंद्र कैंम
वासित अली
ताहिर हुसैन
विराज गहराना
अरसल अहमद
नूरुद्दीन खान
विष्णु दत्त शर्मा
अश्वनी कुमार बिट्टू
बृजेश सरस
हबीब कुरैशी
मुन्नालाल वर्मा
सलमान कुरैशी
बबलू चौधरी
अभय सिंह
अजय बाल्मिक
मोहम्मद अनीस
गौरव कश्यप
नुराग सिंह
रणजीत सिंह
गौरव शर्मा
रंजीत ठाकुर
राजेश पंडित
कम्मो गोयल
शकीरा अहमद
सईद अहमद
ताराचंद
राजीव गुप्ता
ठाकुर दास
गुड्डू भाई
मोहम्मद आबिद
संपादकीय
“बापू के सम्मान की रक्षा केवल शब्दों से नहीं, कर्मों से होती है।”
गांधी प्रतिमाओं की उपेक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं की बदहाली केवल सौंदर्य और स्वच्छता का मामला नहीं है, यह नागरिक गरिमा और सांस्कृतिक सम्मान से जुड़ा प्रश्न है। बच्चों के लिए खतरनाक ढांचे, बदबूदार वातावरण और टूटी-फूटी प्रतिमाएं हमारे शहर की छवि को धूमिल करती हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई करे, ताकि आने वाली पीढ़ियों को बापू की विरासत सुरक्षित और स्वच्छ रूप में मिल सके।
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