Aligarh (Uttar Pradesh, India) । कोरोना काल में प्रत्येक व्यक्ति को सावधानी बरतनी पड़ रही है लेकिन पत्रकारिता से जुड़े व्यक्ति को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। वर्तमान समय में पत्रकार दृढ़ता के साथ काम कर रहे हैं। हमेशा की तरह ग्राउंड लेवल से लेकर प्रोडक्शन कंट्रोल रूम तक सभी अपना कार्य कर रहे हैं ताकि जनता को हमेशा की तरह देश और दुनिया से जोड़ा रखा जा सके। न्यूज चैनल के स्टूडियो में जहां सैकड़ो लोग कार्यरत होते हैं वर्तमान समय में वहां केवल चार लोग कार्य कर रहे हैं। बाकि सभी घर बैठे कार्य कर रहे हैं। ऐसे ही घर बैठे कार्य किया जा सकता है। ये बातें राज्य सभा टीवी के एडिटर इन चीफ राहुल महाजन ने एक ऑनलाइन सत्र के दौरान कहीं।
ये थे मुख्य वक्ता
मंगलायतन विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग (डीजेएमसी) और दृश्य एवं कला विभाग (डीवीपीए) के संयुक्त तत्वाधान में ऑनलाइन वेब क्लास का आयोजन किया गया। जिसका विषय “घर से पत्रकारिता और रचनात्मक कला” था। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर राज्य सभा टीवी के एडिटर इन चीफ राहुल महाजन और डीन- मानविकी और सामाजिक विज्ञान, मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौड़गढ़, राजस्थान, प्रो. चित्रलेखा सिंह थे।
इस परिस्थिति से लड़ाई करते हुए बहुत कुछ सीखना
प्रो. चित्रलेखा सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के समय में चित्रकारी कर अपने अंदर के भावों को उजागर करें। ओम शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि यह शब्द ब्रह्मांड में सत्यता का निरूपण करता है, स्वयं को जागरूक करना ही अपने आप को पहचानना है। इस विषम परिस्थिति से लड़ाई करते हुए हमें बहुत कुछ सीखना है। ये समय है स्वयं को खोजने का। उन्होंने सभी को घर बैठे चित्रकारी सीखने का हौसला दिया। इस दौरान उन्होंने अपने द्वारा बनाए गए चित्र भी दिखाए।
प्रशासन मीडिया के सहयोग के साथ लड़े
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार सतीश कुलश्रेष्ठ ने कहा कि वर्तमान समय में विविधता भिन्नता में बदल रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकार अपनी जान हथेली पर रखते हुए इस परिस्थिति का निडरता से सामना कर रहा है। प्रशासन मीडिया के सहयोग के साथ इससे लड़े। सरकार ने जनता के हित के लिए जो किया उसे मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाए। मंविवि जबलपुर के कुलपति डॉ. एके मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक जीव के अंदर कलाओं का भरमार है, मात्र उसे प्रस्तुत करना आना चाहिए।
लेखन और चित्रकारी भावों से प्रेरित
डीवीपीए की अध्यक्ष डॉ. पूनम रानी ने कहा कि यह समय हम सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। ऑनलाइन माध्यम हमारे लिए वरदान है पेंटिंग जैसी चीज पर शोध कार्य भी हम ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं। जब व्यक्ति का जन्म होता है तभी से ही उसके अंदर क्रिएटिविटी पैदा होने लगती है। डीजेएमसी की अध्यक्ष तथा वरिष्ठ पत्रकार मनीषा उपाध्याय ने कहा कि लेखन और चित्रकारी भावों से प्रेरित होता है। इसलिए आप ब्लॉग्स, पोर्टल्स और सोशल मीडिया के जरिए अपना काम कर सकते हैं। लेकिन प्रोफेशनल मीडियाकर्मी को तो फील्ड में जाना ही होता है। वहीं, प्रवक्ता देवाशीष चक्रवर्ती ने कहा कि विद्यार्थियों से रोज आमने-सामने बैठकर बात करने से आत्मीयता बढ़ी है। इसके प्रभाव से विद्यार्थी और गुरु के बीच का सम्बन्ध और मजबूत हुआ है।
सूत्र मजबूत के साथ सम्पर्क रखना होगा
अध्यक्षता करते हुए पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के डीन और डायरेक्टर प्रो. शिवाजी सरकार ने कहा कि घर बैठे पत्रकारिता भविष्य में भी होती रहेगी, उसके लिए पत्रकारों को अपने सूत्र मजबूत करने के साथ सभी के साथ सम्पर्क रखना होगा। सम्पर्क से ही ये सारी चीजें हो सकतीं है। उन्होंने विद्यार्थीयों से कहा कि ऑनलाइन हम बहुत सारी चीजें कर सकते हैं। ऑनलाइन शोध कर पृष्टभूमिकरण का कार्य कर सकते हैं। इस दौरान विद्यार्थियों ने वक्ताओं से सवाल भी किए।
ये थे मौजूद
संचालन मयंक जैन ने किया। इस दौरान जॉइंट डायरेक्टर ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट तथा एफटेल डॉ धीरज कुमार गर्ग, प्रो. आरके शर्मा, डॉ.राजीव शर्मा, डॉ. सिद्धार्थ जैन, बिलास फाल्के, प्रेमलता यादव, दीक्षा यादव, उदय सिंह, अनुष्का शर्मा, मोहिनी माहेश्वरी, नेहा चौधरी, आयुषी रायज़ादा, मंजीत सिंह, कृपा अरोरा, डौली वर्मा आदि मौजूद थे।
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