भारत ने अगस्त 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा पर उतर कर इतिहास रच दिया। रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन गया था। वहीं दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन गया। चंद्रमा पर विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की कई तस्वीरें शेयर की थीं।
चंद्रमा पर इतिहास रचने वाले दोनों उपकरण अभी भी चांद पर मौजूद हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में एक बार फिर यह देखने को मिले हैं। 25 अप्रैल को इसरो ने इसकी तस्वीरें खीचीं थीं। ऑर्बिटर हाई रेजोल्यूशन कैमरा (OHRC) ने इसकी फोटो खींची है।
OHRC लैंडिंग साइट की हाई रिजोल्यूशन तस्वीरें प्रदान करता है। यह चांद की सतह पर किसी भी क्रेटर या बोल्डर का पता लगाकर लैंडर को सुरक्षित उतरने में मदद करता है। लैंडिंग चरण में अपनी प्रारंभिक भूमिका निभाने के बाद उनका इस्तेमाल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया जाता है। अब इसरो ने चांद की तस्वीर शेयर की है, जिसपर चंद्रयान को देखा जा सकता है।
चांद पर दिखे विक्रम और प्रज्ञान
चंद्रयान-2 के क्रैश होने के बाद उसका मलबा खोजने वाले शनमुगा सुब्रमण्यम ने बताया कि चंद्रमा पर भारत के चंद्रयान-3 मिशन का लैंडर और रोवर दिख रहे हैं। विक्रम लैंडर जहां है, वहां एक लंबी परछाई देखने को मिल रही है। वहीं वहां सफेद चमक भी देखे को मिल रही है, जो सूर्य के प्रकाश के कारण हैं। इसके अलावा प्रज्ञान रोवर भी लैंडर से काफी दूर देखने को मिल रहा है। प्रज्ञान रोवर की भी परछाई देखने को मिल रही है। भारत का लैंडर चांद के जिस हिस्से पर उतरा था, उसे शिव शक्ति पॉइंट कहते हैं।
चंद्रयान-4 को लेकर बड़ा खुलासा
चंद्रयान-3 की कामयाबी के बाद भारत का अगला मिशन चंद्रयान-4 है। इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की चट्टानों और मिट्टी को धरती पर लाना है। चंद्रयान-4 का लैंडर भी शिव शक्ति पॉइंट के करीब उतरने की कोशिश करेगा। शिव शक्ति पॉइंट चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब है। दक्षिणी ध्रुव को लेकर वैज्ञानिकों में खास दलचस्पी है, क्योंकि इस जगह बर्फ के रूप में पानी मौजूद हो सकता है। भविष्य के चंद्रमा बेस के लिए यह महत्वपूर्ण होगा। साथ-साथ यह रॉकेट फ्यूल में भी इस्तेमाल हो सकता है।
-एजेंसी
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