क्या आप जानते हैं कि होलिका की भस्म यानी होली की राख चमत्कारिक शक्ति से सम्पन्न होती है, जिसका प्रयोग कर वातावरण में व्याप्त नकारात्मक शक्तियों को परास्त किया जा सकता है। होली की अग्नि की दहक अनेक प्रकार के बैक्टीरिया एवं रोगों का निराकरण करती है, इसी कारण होली की परिक्रमा एवं होली के भस्म का प्रयोग अति महत्वपूर्ण रहता है।
होली पूजन एवं होलिका दहन के पश्चात् होली की भस्म घर लाने की परम्परा है। ऐसा माना जाता है कि घर में इसे रखने से सभी प्रकार की बुरी आत्माएं घर से पलायन कर जाती हैं और वह घर वर्षभर के लिए सभी प्रकार से सुरक्षित रहता है।
होलिका की अग्नि एवं भस्म के अनेक प्रयोग शास्त्रों में वर्णित हैं। होलिका की विभूति (भस्म) घर लेकर आएं, पुरूष इसे मस्तक पर और महिलाएं इसे गले पर लगाएं जिससे सौभाग्य में वृद्धि हो। होलिका पूजन करने के बाद होली भस्म शरीर पर धारण करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें-
वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।
सभी जानते हैं कि भक्त प्रहलाद को शरणागत वत्सल भगवान विष्णु की भक्ति ने बचाया, दैवीय हस्तक्षेप से होलिका जल गई जबकि होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था, सकारात्मकता के आगे नकारात्मकता परास्त हर युग में हुई है।
शत्रु बाधा निवारण – यदि आप शत्रुओं के मध्य घिर से गए हैं और वे आपके कार्यों में नित्य कोई न कोई बाधा उत्पन्न करते रहते हैं, तो होलिका दहन के समय कुछ गोमती चक्र लें और फिर अपने प्रत्येक शत्रु का नाम लेकर एक-एक गोमती चक्र उस अग्नि में डालते जाएं। ऐसा करने से आपके कार्यों में अनावश्यक बाधा करने वाले विरोधी आपसे दूर होते चले जाऐंगे।
तांत्रिक प्रयोगों से सुरक्षा – यदि आपको शत्रुओं अथवा विरोधियों से किसी प्रकार का खतरा हो और ऐसा लगता हो कि वे आपको किसी प्रकार का नुकसान पहुंचा सकते हैं, तो इससे बचाव हेतु शुभ मुहूर्त में होलिका दहन के पश्चात् उसकी थोड़ी से भस्म ले आएं। फिर उस भस्म में थोड़ी राई, थोड़ा नमक मिलाकर उसे चांदी के ताबीज में भरकर गले में धारण कर लें। ऐसा करने से तंत्र ग्रंथों की व्याख्या के अनुसार व्यक्ति नकारात्मक बंधनों से मुक्त हो जाता है।
वर्ष भर सुरक्षा हेतु परिवार के सभी सदस्यों के पैर के अंगूठे से लेकर, हाथ को सिर से ऊपर पूरा ऊंचा करके कच्चा सूत नाप कर होली में डालें, ऐसा करने से प्रत्येक सदस्य के उपर किसी भी प्रकार की अनावश्यक दुर्घटना और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
होलिका दहन के समय जरूर उपस्थित रहें, अगर किसी कारणवश रात में होली जलते वक्त आप शामिल न हो पाएं ता अगले दिन सुबह सूरज निकलने से पहले जलती हुई होलिका के निकट जाकर कम से कम तीन परिक्रमा अवश्य करें, ग्रहों को प्रसन्न करने के लिए नौ परिक्रमा अनन्त फलदायी मानी गई हैं।
होली के दिन घर आने वाले महमानों को सौंफ और मिसरी जरूर खिलाएं, इससे बुध, चन्द्रमा और शुक्र ग्रह को बल मिलता है, साथ ही प्रेमभाव बढ़ता है।
-एजेंसी
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