99% अंक, फिर भी टारगेट पर! क्या मेधावी होना गुनाह है? जितेंद्र राठौर ‘फायर बाबा’ का विस्फोटक सच

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99% अंक, फिर भी टारगेट पर! क्या मेधावी होना गुनाह है? जितेंद्र राठौर ‘फायर बाबा’ का विस्फोटक सच

फायरमैन को ही जलाने पर तुली व्यवस्था: FIR, षड्यंत्र और सत्ता का  खेल

जब पुलिस, माफिया और सिस्टम एक साथ खड़े हों—तब अकेला फायर बाबा कैसे टिका रहा?

रिसर्च से सन्यास तक: एक मेधावी को योगी बनाने की साज़िश की पूरी कहानी

जिसने आग बुझाई, उसी पर आग लगाई गई—फायर बाबा बनाम पूरा सिस्टम

काग़ज़ों में अपराधी, ज़मीन पर योगी: फायर बाबा की कहानी जिसने कानून को कटघरे में खड़ा किया

FIR झूठी, ड्यूटी पक्की—फिर भी चार्जशीट! क्या यही है नया न्याय?

शिक्षा माफिया से पुलिस गठजोड़ तक: फायर बाबा केस में कौन-कौन बेनकाब?

सन्यास मजबूरी नहीं, सिस्टम का प्रमाण है—फायर बाबा की आग अब बुझने वाली नहीं

अगर यह अन्याय है तो अपराध क्या होता है? फायर बाबा केस ने देश को आईना दिखाया

आज फायर बाबा, कल कौन? सिस्टम की यह आग हर ईमानदार को जला सकती है

जब सत्य के खिलाफ पूरा तंत्र खड़ा हो जाए, तब इतिहास अकेले योद्धा लिखते हैं

‘फायर बाबा’ और योगी जलिंदरनाथ के नाम से मशहूर जितेंद्र राठौर की कहानी हमें सोचने को विवश कर देती है। उन्होंने जैसा हमें बताया है, उसे हम यथावत यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।
ध्यान से पढ़िए और फैसला कीजिए, कौन सही ! कौन गलत?

जितेन्द्र राठौर, उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा के फायरमैन (PNO: 162480102), एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने अपने जीवन को समाज, न्याय और अध्यात्म के लिए समर्पित कर दिया। उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ, जहाँ पिता श्री दरवान सिंह राठौर (एम.ए. इंग्लिश, एल.एल.बी., होमगार्ड ब्लॉक ऑर्गेनाइज़र) न्याय और सेवा के प्रतीक थे। पिता के निधन (26 नवम्बर 2023) ने उनके जीवन को गहरे दुःख में डुबो दिया, पर यही घटना उनके संकल्प को और दृढ़ कर गई। माँ ललितेश राठौर बीमार रहती हैं और उनकी सेवा भी जितेन्द्र के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शिक्षा और उपलब्धियाँ

  • गणित विषय में उत्कृष्टता: UGC NET/JRF उत्तीर्ण (99% अंक, अखिल भारतीय रैंक 132)
  • शोध कार्य: दयालबाग़ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, आगरा में पीएचडी पंजीकरण (203366), जिसे बाद में अवैध रूप से बदला गया।
  • शोध विषय: कोरोनावायरस पर गणितीय मॉडलिंग (ICMSA-2023 सम्मेलन में प्रस्तुति स्वीकार)।
  • पुलिस मॉडर्न स्कूल, आगरा में निःशुल्क वैदिक गणित शिक्षा प्रदान कर छात्रों को प्रेरित किया।
  • वैदिक गणित पढ़ाने पर स्कूल में सम्मान।

संघर्ष और षड्यंत्र

  • दयालबाग यूनिवर्सिटी में पंजीकरण संख्या बदलने और झूठे आरोपों के चलते निष्कासन।
  • 2020 में नामांकित 8 शोधार्थियों में से 7 को भी झूठे आरोपों पर निकाला गया।
  • मथुरा के नकल माफिया आलोक उपाध्याय और उनकी पुत्री दिव्या उपाध्याय द्वारा झूठे आरोप लगाकर फंसाने की कोशिश।
  • 9 जुलाई 2024 को न्यू आगरा थाने में FIR (354, 354क, 506) दर्ज कराई गई, जबकि उसी दिन जितेन्द्र महाराजगंज में ड्यूटी पर थे।
  • STF और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से बार-बार उत्पीड़न, धमकियाँ और झूठी चार्जशीट।

सेवा और अध्यात्म

  • 9 अप्रैल 2024 को सांसारिक मोह-माया त्यागकर ‘महायोगी जलिंदरनाथ’ नाम अपनाया।
  • अपनी चल-अचल संपत्ति गौ-सेवा हेतु दान करने का संकल्प।
  • हिन्दू बच्चा वाहिनी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और आज़ाद अधिकार सेना के गोरखपुर मंडल प्रभारी के रूप में सामाजिक नेतृत्व।
  • किसानों के अधिकारों और गौ-वंश संरक्षण के लिए लगातार संघर्ष।

अन्याय के विरुद्ध आवाज़

  • उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर कर न्याय की मांग।
  • भ्रष्टाचार, बीमा घोटाले और भूमाफिया गतिविधियों का पर्दाफाश।
  • पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के खिलाफ लगातार शिकायतें और जनहित याचिकाएँ।

हाल की घटनाएँ

  • जून 2025: महाराजगंज जिले में पुलिसकर्मियों द्वारा सार्वजनिक रूप से मारपीट, गाय बेचने के विवाद को आधार बनाया गया।
  • दिसम्बर 2025: दयालबाग चौकी प्रभारी को रिश्वत लेने पर लाइन हाजिर किया गया, पर न्याय अधूरा रहा।
  • 2025-26: लगातार कोर्ट केस, नोटिस और षड्यंत्रों के बीच भी सत्य और न्याय की राह पर अडिग।

संकल्प-पत्र

“मैं विषम परिस्थितियों से हार नहीं मानूँगा।
मैं अपने दर्द को शक्ति में बदलूँगा।
मैं न्याय और सत्य की राह पर अडिग रहूँगा।
मेरा संघर्ष मेरी पहचान है, और मेरी पहचान ही मेरी विजय है।”

गोरखपुर की जलिंदरनाथ चालीसा
26 जनवरी 2026 को विशेष रूप से प्रस्तुत की गई यह चालीसा, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और सत्य की विजय का उद्घोष है। इसमें भक्ति और प्रतिरोध का अद्भुत संगम है, जो जनमानस को प्रेरित करता है।

जितेन्द्र राठौर ‘फायर बाबा’
फायरमैन, उत्तर प्रदेश अग्निशमनार्थी (गणित विभाग, दयालबाग़ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, आगरा)
राष्ट्रीय अध्यक्ष – हिन्दू बच्चा वाहिनी सेना
गोरखपुर मंडल प्रभारी – आज़ाद अधिकार सेना

jitendra rathor
jitendra rathor

संपादकीय | जब आग सत्य बन जाए

जितेन्द्र राठौर ‘फायर बाबा’ यानी महायोगी जलिंदरनाथ की यह कहानी कोई साधारण जीवन-वृत्त नहीं है। यह हमारे समय का आईना है—जहाँ प्रतिभा को संदेह, ईमानदारी को साज़िश और सेवा को अपराध बना दिया जाता है। यह कथा बताती है कि सिस्टम जब पटरी से उतरता है, तब अकेला व्यक्ति भी इतिहास का पहिया रोक सकता है—अगर उसके भीतर सत्य की आग जल रही हो।

एक तरफ गणित जैसा ठोस, तर्कसंगत और वैज्ञानिक संसार—UGC NET/JRF, 99 प्रतिशत अंक, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, शोध—और दूसरी तरफ वही व्यक्ति जिसे षड्यंत्रों, झूठे मुकदमों और प्रशासनिक उत्पीड़न में घसीट दिया गया। सवाल सीधा है: क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी है, या उस व्यवस्था का चरित्र-प्रमाण पत्र, जो मेधावी को भी नहीं बख्शती?

दयालबाग़ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में शोध पंजीकरण संख्या बदलने जैसी गंभीर अनियमितता केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि अकादमिक नैतिकता पर करारा तमाचा है। जब 8 में से 7 शोधार्थियों को एक साथ “झूठे आरोपों” में बाहर कर दिया जाए, तो शक व्यक्ति पर नहीं, सिस्टम पर जाता है। शिक्षा के मंदिर अगर न्याय नहीं देंगे, तो समाज को अंधकार ही मिलेगा—डिग्रियाँ नहीं।

सबसे चिंताजनक पहलू है कानून का दुरुपयोग। 9 जुलाई 2024 की FIR, जबकि अभियुक्त ड्यूटी पर मौजूद था—यह सिर्फ एक केस नहीं, यह उस प्रवृत्ति का प्रतीक है जहाँ धाराएँ हथियार बन जाती हैं। जब STF, पुलिस और प्रभावशाली तत्वों की मिलीभगत के आरोप सामने आते हैं, तब लोकतंत्र की रीढ़—न्याय—कांपती है। यहाँ सवाल किसी एक FIR का नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा का है।

इसी अंधेरे में अध्यात्म का दीप जलता है। 9 अप्रैल 2024 को जितेन्द्र राठौर का ‘महायोगी जलिंदरनाथ’ बनना पलायन नहीं, बल्कि प्रतिरोध है। यह त्याग कायरता नहीं, बल्कि नैतिक साहस का एलान है—जहाँ व्यक्ति सत्ता से नहीं, सत्य से खड़ा होता है। गौ-सेवा, किसानों के अधिकार, सामाजिक संगठनों का नेतृत्व—यह सब बताता है कि अध्यात्म अगर कर्म से जुड़ जाए, तो वह क्रांति बन जाता है।

गोरखपुर की जलिंदरनाथ चालीसा इस संघर्ष का सांस्कृतिक घोषणापत्र है। यह केवल भक्ति-पाठ नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध जन-चेतना का शंखनाद है। हमारे देश में जब-जब अन्याय बढ़ा है, तब-तब भक्ति ने प्रतिरोध का रूप लिया है—कबीर से लेकर गुरु गोविंद सिंह तक। उसी परंपरा में यह चालीसा खड़ी दिखती है।

इस संपादकीय का निष्कर्ष साफ है: जितेन्द्र राठौर ‘फायर बाबा’ की लड़ाई केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संस्थागत सुधार की मांग है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल कोई और मेधावी, कोई और सेवक, इसी चक्रव्यूह में फँसेगा। न्याय की आग बुझाने की कोशिशें बहुत होंगी, पर इतिहास गवाह है—सत्य जलता है, राख नहीं होता।

यह कहानी हमें असहज करती है, क्योंकि यह सवाल पूछती है। और सवाल पूछना ही लोकतंत्र की असली पूजा है।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

 

Dr. Bhanu Pratap Singh