यूपी पंचायत चुनाव पर घमासान; मंत्री ओमप्रकाश राजभर बोले— ‘जब तक पिछड़ों का आरक्षण सुनिश्चित नहीं होता, तब तक नहीं होने देंगे चुनाव’

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति लगातार बनी हुई है। एक तरफ जहां माननीय उच्च न्यायालय (High Court) ने आगामी तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ पंचायती राज विभाग ने प्रशासक के रूप में तैनात किए गए ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को अगले छह महीने और बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इस बीच, सूबे के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर का एक आक्रामक बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक जनसभा के दौरान दिए गए उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

​”जब तक पिछड़ों का आरक्षण नहीं, तब तक नहीं होने देंगे चुनाव”

​वायरल वीडियो में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर बेहद कड़े तेवर में नजर आ रहे हैं। उन्होंने मंच से दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक पिछड़ों (OBC) का आरक्षण पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक वे पंचायत चुनाव नहीं होने देंगे और यह शक्ति उनके पास है।

​आलोचकों और विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “कुछ लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। कह रहे हैं कि ओमप्रकाश राजभर को प्रधान नहीं बनने देंगे। उनकी खुद की कोई औकात नहीं है। जितनी जिसकी औकात है, उतना ही बोलें, उससे ज्यादा न बोलें।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव का बिगुल बजेगा।

​”हमारे पास जो पावर है, हम उसका इस्तेमाल कर रहे हैं”

​मंत्री राजभर ने आगे तर्क देते हुए कहा कि पिछड़ा आयोग (Backward Commission) एक बार फिर उच्च न्यायालय जा रहा है। आयोग वहां यह पक्ष रखेगा कि उसने 50 जिलों का काम पूरा कर लिया है, जबकि अभी 25 जिलों का काम शेष है। ऐसी स्थिति में चाहकर भी समय पर चुनाव कराना संभव नहीं हो पाएगा।

प्रशासकों के कार्यकाल को लेकर उन्होंने पुष्टि की कि ग्राम प्रधानों के प्रशासक कार्यकाल को अगले 6 महीने के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है, जो जल्द अमल में आएगा। राजभर ने बेबाक अंदाज में कहा, “हमारे पास जो पावर है, हम उसका खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं। सीधी सी बात है।

वर्तमान में प्रशासकों का कार्यकाल इसी माह 24 नवंबर को समाप्त हो रहा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव और मंत्री के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि फिलहाल पंचायत चुनावों के टलने और प्रशासकों का राज बरकरार रहने की पूरी संभावना है।

Dr. Bhanu Pratap Singh