Agra में 200 ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार, 10 मरीजों की आँखों का ऑपरेशन भी होगा 

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200 ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार, 10 मरीजों की आँखों का ऑपरेशन भी होगा 

पथौली में दिव्य सेवा ट्रस्ट का चिकित्सा शिविर बना ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य का वरदान, छह चिकित्सकों ने दी सेवाएँ, निःशुल्क दवा वितरण भी हुआ

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आगरा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के बीच दिव्य सेवा ट्रस्ट, आगरा ने ग्राम पथौली में निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित कर मानव सेवा का सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। ट्रस्ट की ओर से जनहित में आयोजित इस एक दिवसीय स्वास्थ्य जाँच एवं दवा वितरण शिविर में लगभग 200 ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जाँच की गई और उन्हें निःशुल्क दवाइयाँ वितरित की गईं। शिविर में आँखों की समस्या से पीड़ित 10 मरीजों को ऑपरेशन के लिए चयनित किया गया। इन मरीजों का ऑपरेशन निर्धारित लागत पर 50 प्रतिशत की छूट के साथ कराया जाएगा। वर्ष 2017 में स्थापित दिव्य सेवा ट्रस्ट की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

फ्लाइंग ऑफिसर मोहन सिंह ने किया शिविर का उद्घाटन

ग्राम पथौली, फतेहपुर सीकरी रोड स्थित हाट वाली गली में चौधरी सत्यवीर सिंह (पूर्व प्रधान) के निवास पर आयोजित शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि फ्लाइंग ऑफिसर श्री मोहन सिंह ने किया। शिविर प्रातः 10 बजे से प्रारंभ हुआ। उद्घाटन अवसर पर ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और समय-समय पर चिकित्सकीय जाँच कराने का संदेश दिया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता ने ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और उपयोगिता को भी रेखांकित किया।

छह चिकित्सकों ने संभाली स्वास्थ्य जाँच की जिम्मेदारी

शिविर में डॉ. अलका सेन, डॉ. संजय सेन, डॉ. मीरा, डॉ. अनिल सारस्वत, डॉ. सपना एवं डॉ. शिवांकर सेन ने अपनी चिकित्सकीय सेवाएँ प्रदान कीं। चिकित्सकों ने ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को सुना, आवश्यक जाँच की और उचित परामर्श दिया। जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयाँ भी उपलब्ध कराई गईं। शिविर में आँखों की गंभीर समस्याओं से पीड़ित 10 मरीजों को ऑपरेशन के लिए चयनित किया जाना विशेष उपलब्धि रही। उन्हें ऑपरेशन की निर्धारित लागत में 50 प्रतिशत की रियायत उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को राहत मिलेगी।

चौधरी सत्यवीर सिंह के आवास पर जुटे ग्रामीण, ट्रस्ट पदाधिकारियों ने संभाली व्यवस्थाएँ

शिविर के सफल आयोजन में संरक्षक श्री संतोष कुमार कुलश्रेष्ठ का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग रहा। शिविर व्यवस्थापक चौधरी सत्यवीर सिंह (पूर्व प्रधान) ने अपने निवास पर आयोजन की व्यवस्थाएँ संभालीं। ट्रस्ट के पदाधिकारी सौरभ कुलश्रेष्ठ, चंद्रशेखर शर्मा, आचार्य सुशील कुलश्रेष्ठ, यशवीर सिंह, जगदीश शर्मा एवं रमेश सक्सेना सहित अन्य सहयोगियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और ग्रामीणों की सहभागिता से शिविर सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना ट्रस्ट की प्राथमिकता: डॉ. अलका सेन

ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. अलका सेन ने बताया कि दिव्य सेवा ट्रस्ट, आगरा वर्ष 2017 से स्वास्थ्य, शैक्षिक, साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक सेवाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए निःस्वार्थ भाव से कार्य कर रहा है। ट्रस्ट का प्रयास है कि स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सकीय परामर्श, जाँच और आवश्यक उपचार की सुविधाएँ पहुँचाई जाएँ। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा, ताकि जरूरतमंद लोगों को उनके नजदीक ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।


संपादकीय

डॉ. अलका सेन और दिव्य सेवा ट्रस्ट: जब चिकित्सा सेवा बनती है मानवता का सबसे बड़ा धर्म

किसी समाज की वास्तविक प्रगति का आकलन इस बात से नहीं होता कि उसके पास कितने बड़े अस्पताल, कितनी ऊँची इमारतें और कितनी आधुनिक सुविधाएँ हैं, बल्कि इससे होता है कि समाज का सबसे कमजोर व्यक्ति स्वास्थ्य सुविधा से कितना लाभान्वित हो पा रहा है। चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा का यही मानवीय पक्ष दिव्य सेवा ट्रस्ट, आगरा के कार्यों में दिखाई देता है। ग्राम पथौली में आयोजित निःशुल्क चिकित्सा शिविर इसी सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

जहाँ जरूरत है, वहीं पहुँच रही है सेवा

भारत का ग्रामीण समाज आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और आर्थिक सीमाओं के बीच संघर्ष करता है। अनेक परिवार ऐसे हैं, जो बीमारी की स्थिति में चिकित्सक तक पहुँचने से पहले ही उपचार के खर्च की चिंता में घिर जाते हैं। आँखों की बीमारी हो या सामान्य स्वास्थ्य समस्या, समय पर जाँच और उपचार न मिल पाने से परेशानी बढ़ सकती है।

ऐसे में किसी सामाजिक संस्था का गाँव में पहुँचकर चिकित्सा शिविर आयोजित करना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनता है। पथौली में लगभग 200 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जाँच और निःशुल्क दवा वितरण इसी सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास है।

डॉ. अलका सेन की सोच में सेवा है, केवल औपचारिकता नहीं

डॉ. अलका सेन की अध्यक्षता में दिव्य सेवा ट्रस्ट द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के साथ शैक्षिक, साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को भी महत्व दिया जा रहा है। किसी संस्था के लिए इतने व्यापक क्षेत्रों में काम करने का संकल्प अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है।

पथौली का शिविर इस बात का उदाहरण है कि सेवा को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसे अनेक परिवार हैं, जिन्हें चिकित्सकीय जाँच, विशेषज्ञ परामर्श और उपचार संबंधी सहायता की आवश्यकता है। डॉ. अलका सेन का प्रयास है कि संस्था अपनी सामर्थ्य के अनुसार इन जरूरतों तक पहुँचे।

उनकी विशेषता इस पहल में दिखाई देती है कि चिकित्सा सेवा को सामूहिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास किया गया है। चिकित्सक अपनी विशेषज्ञता दे रहे हैं, ट्रस्ट के पदाधिकारी व्यवस्थाएँ संभाल रहे हैं और स्थानीय लोग आयोजन में सहयोग कर रहे हैं। यही सामूहिक प्रयास किसी सामाजिक अभियान को गति प्रदान करता है।

10 मरीजों के लिए ऑपरेशन में 50 प्रतिशत छूट, छोटी पहल नहीं

इस शिविर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि आँखों के ऑपरेशन के लिए 10 मरीजों का चयन है। आँखें मनुष्य को दुनिया देखने का अवसर देती हैं। दृष्टि संबंधी परेशानी केवल शारीरिक समस्या नहीं होती, बल्कि व्यक्ति की शिक्षा, रोजगार, आत्मनिर्भरता और दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर सकती है।

ऐसे में चयनित मरीजों को ऑपरेशन की निर्धारित लागत पर 50 प्रतिशत की छूट दिलाने का प्रयास सराहनीय है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह राहत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यह पहल बताती है कि चिकित्सा सेवा केवल बीमारी की पहचान तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को उपचार तक पहुँचाने का प्रयास भी होना चाहिए।

चिकित्सकों का समर्पण ही शिविर की वास्तविक शक्ति

किसी भी निःशुल्क चिकित्सा शिविर की सफलता के पीछे चिकित्सकों का समय, अनुभव और सेवाभाव महत्वपूर्ण होता है। डॉ. अलका सेन, डॉ. संजय सेन, डॉ. मीरा, डॉ. अनिल सारस्वत, डॉ. सपना एवं डॉ. शिवांकर सेन ने अपनी सेवाएँ देकर इस आयोजन को सार्थक बनाया।

चिकित्सा पेशा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी से जुड़ा ऐसा क्षेत्र है, जहाँ किसी व्यक्ति को समय पर मिला उपचार उसके जीवन की दिशा बदल सकता है। चिकित्सक जब अपनी विशेषज्ञता को समाज के वंचित वर्गों तक पहुँचाते हैं, तब चिकित्सा का वास्तविक सामाजिक स्वरूप सामने आता है।

समाज को ऐसे सेवा अभियानों से जुड़ना होगा

दिव्य सेवा ट्रस्ट की पहल को केवल एक दिन के शिविर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसकी वास्तविक सफलता तब होगी, जब अधिक सामाजिक संस्थाएँ, चिकित्सक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और जागरूक नागरिक ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए आगे आएँगे।

जरूरत इस बात की भी है कि ऐसे शिविरों के माध्यम से मरीजों की समस्याओं का रिकॉर्ड रखा जाए, जरूरतमंद मरीजों को आगे के उपचार से जोड़ा जाए और गंभीर बीमारियों के लिए उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। इससे एक दिवसीय आयोजन निरंतर स्वास्थ्य सहयोग की मजबूत कड़ी बन सकता है।

डॉ. अलका सेन के प्रयासों को मिले व्यापक सामाजिक समर्थन

डॉ. अलका सेन और दिव्य सेवा ट्रस्ट के प्रयासों का महत्व इसलिए भी है कि वे समाज के बीच जाकर जरूरतों को समझने और अपनी क्षमता के अनुसार समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। सेवा का मार्ग आसान नहीं होता। इसके लिए समय, संसाधन, इच्छाशक्ति और निरंतरता की आवश्यकता होती है।

वर्ष 2017 से संचालित संस्था की गतिविधियों को व्यापक विस्तार देने के लिए समाज के संपन्न वर्ग, चिकित्सा जगत और अन्य सामाजिक संगठनों को भी सहयोग करना चाहिए। यदि प्रत्येक व्यक्ति और संस्था अपने सामर्थ्य का थोड़ा-सा हिस्सा भी जरूरतमंदों के लिए समर्पित कर दे, तो स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

अंततः, डॉ. अलका सेन के नेतृत्व में पथौली में आयोजित यह चिकित्सा शिविर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है—सेवा का सबसे सुंदर स्वरूप वही है, जो किसी जरूरतमंद की पीड़ा कम करे। किसी गरीब की बीमारी की समय पर पहचान हो जाए, किसी बुजुर्ग को उचित दवा मिल जाए और किसी जरूरतमंद को आँखों की रोशनी वापस पाने की उम्मीद मिल जाए, तो इससे बड़ा सामाजिक संतोष क्या हो सकता है?

दिव्य सेवा ट्रस्ट की इस पहल को इसी मानवीय दृष्टि से देखा जाना चाहिए। क्योंकि अस्पतालों में उपचार मिलता है, लेकिन जब चिकित्सा सेवा संवेदना के साथ गाँव की चौखट तक पहुँचती है, तब वह मानवता का उत्सव बन जाती है।

डॉ भानु प्रताप सिंह, सपादक

Dr. Bhanu Pratap Singh