लखनऊ/बरेली: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। इसी कड़ी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रोहिलखंड की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक बड़ा झटका लगा है। आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र कश्यप और उनकी सुपुत्री कीर्ति कश्यप ने मंगलवार को अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया। लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद दोनों नेताओं को पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई और सपा का पटका पहनाकर स्वागत किया।
”रोहिलखंड और पूरे यूपी में बढ़ी हमारी शक्ति”: अखिलेश यादव
पूर्व सांसद के सपा में शामिल होने पर खुशी जताते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा “पूर्व सांसद श्री धर्मेंद्र कश्यप जी व उनकी सुपुत्री श्रीमती कीर्ति कश्यप के ‘पीडीए आंदोलन’ से जुड़ने से बरेली, रोहिलखंड व पूरे उप्र में हमारी शक्ति कई गुनी बढ़ गई है। हम उनका और उनके साथ आए सभी लोगों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं। ‘सबको सम्मान-सबको स्थान’ के अपने वचन के साथ हम हर एक को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। आज जो लोग कभी आमने-सामने चुनाव लड़े थे, आज वो ‘पीडीए’ के बड़े उद्देश्यों के लिए समस्त प्रतिस्पर्धा भूलकर हाथ-में-हाथ डालकर एकजुट हो गए हैं। ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) ही मिलकर भाजपा के प्रभुत्ववाद का अंतिम अध्याय लिखेगा।”
’टाटा बाय-बाय’ पोस्ट के बाद बीजेपी से दूर हुए थे कश्यप
धर्मेंद्र कश्यप की गिनती रोहिलखंड क्षेत्र के प्रमुख ओबीसी चेहरों में होती है। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से की थी और वर्ष 2002 में बसपा से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2003 में वे सपा में शामिल हुए और तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार में राज्यमंत्री बने। वर्ष 2014 में वे भाजपा में शामिल हो गए और 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनावों में आंवला सीट से जीतकर संसद पहुंचे।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद और हाल ही में राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी की ओर से प्रत्याशी न बनाए जाने पर वे भाजपा शीर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘टाटा बाय-बाय’ लिखकर अपने सियासी रुख का संकेत दिया था, जिसके बाद अखिलेश यादव से हुई मुलाकातों ने उनके सपा में लौटने का मार्ग प्रशस्त किया।
रोहिलखंड में ‘PDA’ समीकरण मजबूत करने में जुटे अखिलेश
सपा प्रमुख अखिलेश यादव इन दिनों प्रदेश में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) गोलबंदी को मजबूत करने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। धर्मेंद्र कश्यप से पहले बदायूं के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य ने भी अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ली थी।
बरेली, आंवला और बदायूं के इस सियासी क्षेत्र में कश्यप और शाक्य समाज के बड़े नेताओं का सपा के पाले में आना भाजपा के पारंपरिक गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी के रूप में देखा जा रहा है। 2027 के महासमर से पहले रोहिलखंड की इस हलचल ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में गरमाहट बढ़ा दी है।
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