नई दिल्ली: देश में चुनावों के दौरान कथित धांधली के आरोपों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR / एलआईआर) विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और भारतीय निर्वाचन आयोग के खिलाफ जारी राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के बीच, मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। बीजेपी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने अतीत में उन सभी चुनाव आयुक्तों को बड़े-बड़े पदों और पुरस्कारों से नवाजा, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान पार्टी का पक्ष लिया था।
राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस हमेशा चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है, लेकिन जब अपने खुद के इतिहास और ट्रैक रिकॉर्ड को देखने की बारी आती है, तो वह पूरी तरह से आंखें मूंद लेती है।
”एनडीए सरकार ने चुनाव आयोग को दी काम करने की पूरी आजादी”
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में एनडीए सरकार ने निर्वाचन आयोग को पूरी तरह स्वावलंबी, निष्पक्ष और देशहित तथा जनहित में काम करने की आजादी दी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने किसी भी नियुक्त चुनाव आयुक्त को कोई राजनीतिक फायदा पहुंचाने या उन्हें लुभाने का प्रयास कभी नहीं किया, बल्कि उन्हें पूरी ईमानदारी और स्वतंत्रता से काम करने दिया।
राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए गोयल ने कहा, “अगर राहुल गांधी अपना और अपनी पार्टी का पिछला रिकॉर्ड देखें, जिसे वे जानबूझकर नजरअंदाज कर देते हैं, तो इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने एक चुनाव आयुक्त को चुनाव में टिकट दिया, एक को केंद्र में मंत्री बनाया और दो-दो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल के पदों से नवाजा।”
टीएन शेषन, एमएस गिल और नवीन चावला का किया विशेष उल्लेख
बीजेपी नेता पीयूष गोयल ने अतीत की घटनाओं का ब्योरा देते हुए कहा कि कांग्रेस ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन को गुजरात की प्रतिष्ठित गांधीनगर सीट से लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। इसके अलावा एम.एस. गिल को पद्म विभूषण जैसा देश का उच्च नागरिक सम्मान दिया गया। उन्होंने पूर्व सीईसी नवीन चावला की नियुक्ति की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें केवल इसलिए सीईसी पद से नवाजा गया था क्योंकि चुनाव आयुक्त रहते हुए उन्होंने कांग्रेस पार्टी का पक्ष लिया था।
इसके साथ ही उन्होंने 1986 का उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त आर.के. त्रिवेदी को चुनाव आयोग से हटते ही गुजरात का राज्यपाल बना दिया गया था। पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकारें किसी भी दूसरे संबंधित पक्ष या पारदर्शी व्यवस्था से सलाह-मशविरा किए बिना ही मनमाने ढंग से ये नियुक्तियां करती थीं।
2023 के नए कानून से चयन प्रक्रिया में आई पारदर्शिता
विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ही है जो वर्ष 2023 में एक नया और पारदर्शी कानून लेकर आई। इस नए कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की चयन समिति (Selection Committee) में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को औपचारिक रूप से सदस्य बनाया गया।
उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री के साथ एक ही मेज पर बैठकर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के नामों का चयन करते हैं। ऐसे में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना केवल राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।
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