प्रयागराज में शिक्षा की अलख: 4 साल बाद स्कूल लौटीं 11 वर्षीय नाजिया, ‘एजुकेट गर्ल्स’ की पहल से पीएम श्री स्कूल में हुआ दाखिला

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प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ ब्लॉक की रहने वाली 11 वर्षीय नाजिया की कहानी आज ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा के प्रति एक नई उम्मीद जगा रही हैं। लगातार चार वर्षों (2022 से 2026) तक स्कूल से दूर रहने और पारिवारिक मजबूरियों के कारण घर के काम संभालने वाली नाजिया का दाखिला मई 2026 में नजदीकी ‘पीएम श्री विद्यालय’ की चौथी कक्षा में कराया गया।

गरीबी और घर की जिम्मेदारियों के चलते छूटी थी पढ़ाई

नाजिया के पिता नूर मोहम्मद और माँ रहमतून निशा दैनिक मजदूरी कर आठ सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण कक्षा 1 में दाखिले के बाद ही नाजिया को पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। माता-पिता के काम पर चले जाने के बाद दूर पहाड़ियों से पानी ढोना, घर का चूल्हा-चौका करना और छोटे भाई-बहनों की देखरेख का पूरा बोझ इस मासूम बच्ची के कंधों पर आ गया था।

सोशल मैपिंग और काउंसलिंग ने बदली सोच

वर्ष 2026 में गैर-सरकारी संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ द्वारा चलाए गए सोशल मैपिंग अभियान के दौरान आँगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से नाजिया के स्कूल न जाने की जानकारी मिली। संस्था के फील्ड कोऑर्डिनेटर ने नाजिया के घर पहुँचकर उनके माता-पिता से संपर्क किया। शुरुआत में हिचकिचा रहे परिजनों को कई दौर की काउंसलिंग के बाद बच्ची को पढ़ाने के लिए राजी किया गया।

18 दिनों के समर कैंप से बढ़ा आत्मविश्वास

दाखिले से पहले संस्था की ओर आयोजित 18-दिवसीय समर कैंप में नाजिया ने 100% उपस्थिति दर्ज कराई। खेल-कूद, हिंदी, अंग्रेजी और गणित की रोचक गतिविधियों ने नाजिया की झिझक दूर कर दी। घर लौटकर जब नाजिया ने अपने माता-पिता को सीखी हुई बातें सिखानी शुरू कीं, तो परिजनों का शिक्षा के प्रति भरोसा और मजबूत हो गया।

शिक्षिका बनने का सपना

मई 2026 में पीएम श्री विद्यालय में दाखिला मिलने के बाद नाजिया अब न केवल नियमित रूप से स्कूल जा रही हैं, बल्कि अपने छोटे भाई-बहनों को भी साथ ले जाती हैं और घर पर उन्हें पढ़ाती हैं। नाजिया का सपना पढ़-लिखकर एक टीचर बनने का है, ताकि वे अपने परिवार को गरीबी के दुचक्र से बाहर निकाल सकें।

विद्या: हर बच्चे की बुनियादी शिक्षा मजबूत करने की पहल

एजुकेट गर्ल्स का ‘विद्या’ कार्यक्रम सरकारी स्कूलों में 7 से 14 साल तक के बच्चों की बुनियादी पढ़ाई को मजबूत करने की एक समुदाय-आधारित पहल है। इस कार्यक्रम में गाँव के ही प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवक, जिन्हें ‘टीम बालिका’ कहा जाता है, स्कूल के साथ मिलकर बच्चों को संस्था के विशेष पाठ्यक्रम ‘ज्ञान का पिटारा’ के माध्यम से पढ़ाते हैं।

खेल-खेल में और गतिविधियों के जरिए बच्चों के हिंदी, अंग्रेजी और गणित के बुनियादी कौशल बेहतर किए जाते हैं, ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई में पीछे न छूटे। इस पहल से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि और आत्मविश्वास बढ़ता है, और समुदाय भी बेटियों की शिक्षा में सक्रिय भागीदार बनता है।

Dr. Bhanu Pratap Singh