लखनऊ में फिर गरमाया ‘पोस्टर वॉर’; नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर लगे विवादित पोस्टर

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चल रहे मतदान के बीच राजधानी लखनऊ की सड़कों पर एक बार फिर ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ ने जोर पकड़ लिया है। शहर के प्रमुख नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे पर कुछ अज्ञात संगठनों द्वारा लगाए गए विवादित पोस्टर्स ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इन पोस्टर्स के जरिए एक बार फिर समाजवादी पार्टी (SP) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया है।

पोस्टर्स में किन चेहरों और मुद्दों को किया गया शामिल?

​सामने आए इन नए पोस्टर्स में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की एक ऐसी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है जिसमें वह मुस्लिम समुदाय की पारंपरिक कुफ़ी (टोपी) पहने नजर आ रहे हैं। इसके अलावा इन पोस्टर्स में दिवंगत माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के साथ-साथ पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की तस्वीरें भी प्रमुखता से लगाई गई हैं।

पोस्टर में माफियाओं और सपा नेताओं के संबंधों को लेकर तीखे तंज कसे गए हैं और उन्हें एक-दूसरे का ‘भाई’ करार दिया गया है। साथ ही, इसमें एक पुराने न्यूज आर्टिकल के स्क्रीनशॉट को भी शामिल किया गया है, जिसका शीर्षक— “अतीक अहमद को सपा में वापसी के बाद इनाम में मिली थी पंडित नेहरू की सीट, जानिये राजू पाल से कैसे शुरू हुई दुश्मनी”— दिया गया है।

पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी है पोस्टर वॉर

राजधानी लखनऊ में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार विपक्षी दलों और नेताओं को लक्षित करते हुए विवादित होर्डिंग्स और पोस्टर्स लगाने का सिलसिला चल रहा है। इससे पहले विजयदशमी के पावन अवसर पर 1090 चौराहे पर ‘योगी सेना (भारत)’ के मोहित मिश्रा की ओर से ‘भारत के विरोधी रावण’ शीर्षक से पोस्टर लगाए गए थे, जिसमें कई नामचीन हस्तियों और एक्टिविस्ट्स के चेहरे शामिल किए गए थे।

इसके अलावा ‘सनातन रक्षा संगठन’ की तरफ से भी शहर में ऐसे पोस्टर्स लगाए जा चुके हैं, जिनमें देश-विदेश के कई जाने-माने चेहरों को जोड़कर सियासी माहौल गरमाने की कोशिश की गई थी।

जानकारों का मानना है कि विधान परिषद चुनावों और आगामी राजनीतिक रणनीतियों के बीच इस तरह के पोस्टर्स के जरिए विरोधी दल और संगठन राजनीतिक तापमान को लगातार ऊपर रखने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल, इन मामलों पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं और प्रशासनिक संज्ञान का इंतजार है।

Dr. Bhanu Pratap Singh