​”विकास सहयोग और वैश्विक साझेदारी से ही संभव है सतत विकास”: संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित बैठकों में सांसद नवीन जैन ने रखा भारत का पक्ष

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नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद नवीन जैन जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारतीय संसदीय दल के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित विभिन्न महत्वपूर्ण बैठकों में सहभागिता की। इस दौरान भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच विकास सहयोग, वैश्विक साझेदारी तथा विभिन्न देशों में जनकल्याणकारी परियोजनाओं के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

इसी क्रम में सांसद नवीन जैन जी ने भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष से संबंधित बैठक में सहभागिता की। बैठक में भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच विकास सहयोग को मजबूत करने, वैश्विक साझेदारी को आगे बढ़ाने तथा विभिन्न देशों में जनकल्याणकारी परियोजनाओं के माध्यम से विकास के प्रयासों को गति देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही सतत विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा प्रयासों के महत्व पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

सांसद नवीन जैन जी ने इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की विकास साझेदारी और वैश्विक सहयोग की भावना को रेखांकित किया। भारत लंबे समय से मानव कल्याण, समावेशी विकास और विभिन्न देशों के साथ सहयोग के माध्यम से साझा प्रगति के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। भारत का दृष्टिकोण विकास के लाभों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने तथा जरूरतमंद समुदायों के कल्याण के लिए सहयोगात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।

भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से विभिन्न देशों में जनकल्याणकारी परियोजनाओं और सतत विकास से जुड़े प्रयासों को सहयोग मिलता है। ऐसे प्रयास अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करने और विकास से संबंधित साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान सांसद नवीन जैन जी की इन बैठकों में सहभागिता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकास सहयोग, मानव कल्याण और वैश्विक साझेदारी से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया। यह सहभागिता विभिन्न देशों के साथ सहयोग के माध्यम से सतत विकास और साझा प्रगति के प्रयासों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।




Dr. Bhanu Pratap Singh