नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधारों को लेकर चल रहे छात्रों के आंदोलन ने अब राजनीतिक दलों का ध्यान पूरी तरह से युवा पीढ़ी की ओर खींच लिया है। पक्ष हो या विपक्ष, आज हर तरफ ‘GEN-Z’ और ‘GEN-अल्फा’ पीढ़ी की चर्चा हो रही है। इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती भी मैदान में उतर आई हैं और उन्होंने अपनी पार्टी के सभी नेताओं को GEN-Z व GEN-अल्फा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के निर्देश दिए हैं।
देश के विभिन्न राज्यों में छात्र लगातार बेहतर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राजनीतिक दल भी इन मुद्दों को भुनाने और खुद को युवाओं का हितैषी साबित करने की होड़ में लगे हैं। ऐसे में मायावती ने विपक्षी दलों पर GEN-Z और GEN-अल्फा के आंदोलनों का राजनीतिक लाभ उठाने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान युवाओं को जो बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे, वे अब स्वतंत्र कम और राजनीतिक ज्यादा नजर आने लगे हैं, जिससे ये गंभीर शंकाओं के घेरे में घिर चुके हैं।
‘आंदोलन को राजनीतिक दलों ने कर लिया है हाईजैक’
बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए लिखा, “देश में एक नहीं बल्कि अनेकों ऐसे उदाहरण हैं जिससे लोगों को यह लग रहा है कि युवाओं और बेरोजगारों आदि की ज्वलंत समस्याओं को लेकर चल रहा जेन-जी (Gen-Z) का यह आंदोलन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा हाईजैक कर लिया गया है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान इनको जो बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे, वे अब स्वतंत्र कम व राजनीतिक ज्यादा होकर गंभीर शंकाओं में घिर गए हैं।”
उन्होंने आगे लिखा, “किंतु खासकर जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) की जरूरी मांगों को लेकर बीएसपी को पूरी सहानुभूति और इसके प्रति चिंता हमेशा से रही है। आगे भी उनके सहयोग के लिए बीएसपी के सभी स्टेट यूनिटों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपने-अपने राज्य व क्षेत्र में संबंधित अधिकारियों से मिलकर उनकी समस्याओं के शांतिपूर्ण तरीके से समाधान के लिए जरूर तत्पर रहें।”
‘पार्टी के लोग धरना-प्रदर्शन न करें, अपनी ऊर्जा चुनाव के लिए बचाएं’
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने की हिदायत देते हुए कहा कि बीएसपी के अनुशासित नियमों के अनुसार पार्टी के लोग किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन और आंदोलन आदि में शामिल न हों। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपनी तन, मन और धन की शक्ति व ऊर्जा को आगामी चुनावों के लिए सुरक्षित रखें, ताकि करोड़ों दलितों और अन्य उपेक्षितों के मसीहा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपनों को साकार करने वाली ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि इसी सरकार के जरिए जेन-जी, जेन-अल्फा सहित पूरे सर्वसमाज की सभी दुख-तकलीफों का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है, जैसा कि यूपी में बीएसपी की चार बार रही सरकारों के दौरान करके भी दिखाया गया है।
संजय आज़ाद प्रकरण पर सख्त कार्रवाई की मांग
अपने पोस्ट के अंत में मायावती ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए लिखा, “इसके साथ ही, जेन-जी के जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान पुलिस अगर समय से उचित कार्रवाई करती तो श्री संजय आजाद जैसी गंभीर घटना नहीं होती। अब इस प्रकरण के अभियुक्तों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, वरना फिर बीएसपी भी ऐसे मामलों में पीछे नहीं रहेगी।”
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