योगी सरकार का कड़ा एक्शन: PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री निलंबित, शामली कलेक्ट्रेट से किए गए अटैच

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उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। निलंबन की अवधि में उन्हें शामली कलेक्ट्रेट कार्यालय से अटैच किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच बरेली मंडलायुक्त को सौंपी गई है।

यह कार्रवाई उस घटनाक्रम के बाद हुई है, जब सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी थी। गणतंत्र दिवस जैसे मौके पर दिए गए इस्तीफे ने प्रदेश स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस को जन्म दे दिया।

माघ मेले की घटना को बताया इस्तीफे की वजह

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने सात पन्नों के इस्तीफे में प्रयागराज माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों के साथ कथित अभद्रता का विरोध जताया था। उन्होंने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे पत्र में लिखा कि मौनी अमावस्या स्नान के दौरान साधु-संतों और ब्राह्मणों के साथ मारपीट हुई, जो गंभीर और चिंताजनक है।

इस्तीफे में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा शासन व्यवस्था में जनतंत्र और गणतंत्र की जगह “भ्रमतंत्र” हावी हो गया है। साथ ही यूजीसी के नए कानून का भी खुला विरोध दर्ज कराया।

सोशल मीडिया पर पोस्टर के साथ तस्वीर वायरल

इस्तीफे के दिन अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े दिखाई दिए। पोस्टर में यूजीसी कानून को “काला कानून” बताते हुए उसे वापस लेने की मांग की गई थी, साथ ही शंकराचार्य और संतों के अपमान का मुद्दा उठाया गया था।

डीएम आवास को लेकर लगाए गंभीर आरोप

इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री डीएम आवास पहुंचे, जहां वह करीब एक घंटे तक रहे। बाहर निकलने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें डीएम आवास पर बंधक बनाया गया और लखनऊ से आए एक कॉल में उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।

उनका कहना था कि उन्होंने सचिव को फोन कर खुद को बंधक बनाए जाने की जानकारी दी, जिसके बाद उन्हें छोड़ा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि साजिश के तहत उन्हें रातभर वहीं रोकने की कोशिश की गई।

प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज

इन आरोपों पर बरेली के एडीएम देश दीपक सिंह ने साफ कहा कि बंधक बनाने जैसी कोई स्थिति नहीं थी। उनके अनुसार अलंकार अग्निहोत्री स्वयं बातचीत के लिए डीएम आवास आए थे और सौहार्दपूर्ण चर्चा के बाद लौट गए। प्रशासन ने सभी आरोपों को निराधार बताया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज

सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने राज्य सरकार पर शंकराचार्य को परेशान करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने बयान दिया कि उन्हें इस अधिकारी के बारे में कोई जानकारी नहीं है और कुछ लोग राजनीतिक कारणों से ऐसे कदम उठाते हैं।

प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा कि देश में लोकतंत्र है और संसद से पारित कानून जनहित में होते हैं, जरूरत पड़ने पर उनमें सुधार किया जा सकता है।

इस्तीफा वापसी की मांग

कर्मचारी कल्याण सेवा समिति बरेली कॉलेज के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उसकी वापसी की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन किया जाएगा।

Dr. Bhanu Pratap Singh