जब कोई महिला गर्भवती होती है तभी से उसके स्तन शिशु को स्तनपान कराने की तैयारी शुरू कर देते हैं। इसीलिए कहते हैं कि जब एक स्त्री गर्भवती हो जाती है तो उसे पौष्टिक और शुद्ध आहार खाना चाहिए क्योंकि वही आहार उसके दूध के रूप में परिवर्तित होता है, जो आगे चलकर शिशु का आहार बनता है| आहार में सलाद, दाल, फल, जूस, लहसुन, अदरक, गाजर, नारियल का पानी समेत जितनी भी शक्तिवर्धक चीजें हैं और जो मां का मन करता है, वह खानी चाहिए। इससे दूध की मात्रा भी अधिक होती है और पौष्टिक भी रहता है|
वर्तमान युग में अधिकतर महिलाएं कामकाजी होती हैं। इसी कारण विश्व में स्तनपान को लेकर दुनिया भर की सरकारें बहुत ही सजग रहती हैं| अनेक सरकारें तो गर्भावस्था से लेकर स्तनपान के समय तक उन्हें वेतन के साथ छुट्टी का लाभ देती है| कई देशों में तो ब्रेस्टफीडिंग के नाम से बूथ भी बने रहते हैं ताकि वहां माँ अपने बच्चे को सुरक्षित स्तनपान करा सकें|
अनेक बार यह प्रश्न उठता है कि मां को अपना कब तक दूध पिलाना चाहिए, चिकित्सकों की राय के अनुसार बच्चे को कम से कम 6 महीने तो मां का दूध अवश्य पिलाना चाहिए। धीरे-धीरे उसे अन्य आहार के साथ डेढ़ वर्ष तक दूध पिलाने से मां और बच्चे के लिए स्वास्थ्य के लिए उत्तम रहता है। स्तनों में जब तक दूध उपलब्ध रहता है और जब तक कि बच्चा पीना चाहता है, मां तब तक अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती है। बालरोग चिकित्सकों का कहना है कि जो बच्चे अपनी मां का दूध पीते हैं, उनकी अपनी मां से रिश्ता प्यारा व बहुत मजबूत होता है| बच्चे में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। मोटापा या अन्य बीमारियों से काफी हद तक सुरक्षित रहता है। बौद्धिक क्षमता ज्यादा होती है| हमारे पूर्वज थे अपनी मां का स्तनपान करते थे और वह ज्यादा बलिष्ठ और कुशाग्र बुद्धि की होते थे|
चिकित्सकों का कहना है कि जो माँ अपने बच्चे को लंबे समय तक अपना दूध पिलाती है वह ज्यादा स्वस्थ होती है और उसका शरीर ज्यादा बैलेंस रहता है| अनेक दफा ऐसी परिस्थिति भी आती है जब मां को या तो दूध बनता नहीं है या फिर अत्यधिक बनता है| ऐसे में उन मांओं को अपने दूध को रोकना नहीं चाहिए नहीं तो ब्रेस्ट में गांठ पड़ने का डर बना रहता है, जिससे कैंसर की भी संभावना बन जाती है|
आज आधुनिक परिवेश के चलते हुए अपनी फिगर मेंटेन करने के लिए अनेक महिलाएं अपने बच्चे को दूध पिलाने से परहेज करती हैं। मांएं जान लें कि बच्चे को दूध पिलाना अति आवश्यक है। यह आपके फिगर को खराब नहीं करता है बल्कि उल्टे आपको स्वस्थ और सुडौल बनाता है। आज आधुनिकता की दौड़ में अनेक महिलाओं द्वारा ब्रेस्टफीडिंग नहीं कराया जाता है। इस प्रकार की भ्रांतियों को दूर के लिए 120 देशों में 1-7 अगस्त तक स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। स्तनपान सप्ताह का विचार यूनिसेफ द्वारा 14 फरवरी 1991 में आया था और वर्ष 1992 में पहली बार वर्ल्ड एलाइंस फॉर ब्रेस्टफीडिंग एक्शन ( डब्ल्यू ए बी ए ) की ओर से मनाया गया था।

राजीव गुप्ता ‘जनस्नेही’
लोकस्वर, आगरा
- Parhaat nettikasinot 2026: Luotettavuus ja bonusten arviointi - June 16, 2026
- Past Win Records and Big Payouts in Big Bass Bonanza Machine for United Kingdom - June 16, 2026
- Gioca dal vivo e vinci subito in Italia su Golisimo Casino - June 15, 2026