लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के कल्याण, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर योगी सरकार ने एक प्रभावी और व्यावहारिक मॉडल स्थापित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते एक वर्ष के दौरान महिलाओं, किशोरियों और बालिकाओं के जीवन में ठोस और सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। यह परिवर्तन केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा, स्वावलंबन, सम्मान और अवसरों से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक बदलाव बन चुका है।
बेटियों के भविष्य को संवारने की मजबूत पहल
बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना के तहत इस वर्ष 13,612 गतिविधियों के माध्यम से लगभग 25.5 लाख महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक किया गया। योजना का उद्देश्य बालिकाओं के जन्म को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना, लिंग चयन जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करना और बाल लिंगानुपात में सुधार लाना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाकर इस योजना ने बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
कन्याओं को शिक्षा और सम्मान का आर्थिक आधार
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना अब प्रदेश की सबसे प्रभावशाली सामाजिक योजनाओं में शुमार हो चुकी है। इस वर्ष 130.03 करोड़ रुपये की धनराशि से 3.28 लाख कन्याओं को लाभ पहुंचाया गया। जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक छह चरणों में मिलने वाली सहायता ने बेटियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को बदला है और बालिका शिक्षा को नई मजबूती दी है।
निराश्रित महिलाओं को मिला स्थायी सहारा
निराश्रित महिला पेंशन योजना के अंतर्गत 38.58 लाख महिलाओं को नियमित मासिक सहायता दी जा रही है। इस वर्ष इस योजना पर करीब 1,200 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि अनुपूरक बजट में भी लगभग 535 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पारदर्शी चयन प्रक्रिया और डीबीटी व्यवस्था के जरिए विधवा, परित्यक्ता और असहाय महिलाओं को सम्मानजनक जीवन का आधार मिला है।
इसके साथ ही रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष के तहत इस वर्ष 3,519 पीड़िताओं को लगभग 116.36 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दी गई।
मिशन शक्ति से सुरक्षा और जागरूकता का विस्तार
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सशक्तिकरण और सम्मान के उद्देश्य से संचालित मिशन शक्ति अपने पांचवें चरण में पहुंच चुका है। इस अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग सहित 28 विभागों, सामाजिक संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से करीब 9 करोड़ लोगों तक पहुंच बनाई गई। “हक की बात जिलाधिकारी के साथ” और “स्वावलंबन कैंप” जैसे कार्यक्रमों के जरिए महिलाएं खुलकर अपनी समस्याएं और सुझाव प्रशासन तक पहुंचा रही हैं।
त्वरित न्याय और सहायता की मजबूत व्यवस्था
हिंसा पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सा, कानूनी परामर्श और पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 75 से अधिक वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं। इस वर्ष 24,671 महिलाओं को इन केंद्रों से मदद मिली है।
इसके अलावा 181 महिला हेल्पलाइन 24 घंटे सक्रिय है, जिसके माध्यम से घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और आपात स्थितियों में 56,507 महिलाओं को त्वरित सहायता प्रदान की गई। हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वुमेन के जरिए महिलाओं और किशोरियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
सुरक्षित आवास से महिलाओं को मिला भरोसा
निराश्रित, परित्यक्त और कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की दिशा में भी सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। माता अहिल्याबाई होल्कर श्रमजीवी महिला हॉस्टल योजना के तहत सात जनपदों में 500-500 क्षमता वाले हॉस्टल बनाए जा रहे हैं।
लखनऊ, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में कामकाजी महिलाओं के लिए आठ छात्रावास निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा आठ जनपदों में राजकीय महिला शरणालय, मथुरा में 1,000 क्षमता वाला कृष्ण कुटीर, 14 शक्ति सदन और 13 सखी निवास के माध्यम से महिलाओं को सुरक्षित आश्रय दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, योगी सरकार की ये पहलें महिलाओं के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं और उत्तर प्रदेश को महिला सशक्तिकरण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित कर रही हैं।
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