नई दिल्ली। बजट सत्र की शुरुआत बुधवार को संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने रक्षा, व्यापार और विकास समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के साथ भारत इस सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है और बीते 10–11 वर्षों में देश ने हर क्षेत्र में अपनी नींव को मजबूत किया है। राष्ट्रपति के अनुसार, यह समय विकसित भारत की यात्रा के लिए अहम आधार तैयार करने का है।
अभिभाषण के दौरान उस वक्त सदन में हंगामे की स्थिति बन गई, जब राष्ट्रपति ने विकसित भारत से जुड़े ‘जी राम जी कानून’ का जिक्र किया। इस कानून का नाम लेते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और विरोध जताया। राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों और विकास को गति देने के उद्देश्य से यह कानून बनाया गया है, लेकिन उनके इतना कहते ही विपक्ष भड़क उठा।
विपक्षी सांसद “वापस लो, वापस लो, यह कानून वापस लो” जैसे नारे लगाते रहे। वहीं, सत्ता पक्ष और एनडीए समर्थक सांसदों ने मेज थपथपाकर राष्ट्रपति के अभिभाषण और कानून का समर्थन किया। कुछ मिनटों तक चले हंगामे के बाद स्थिति शांत हुई और राष्ट्रपति का अभिभाषण आगे जारी रहा।
गौरतलब है कि पिछले संसद सत्र में केंद्र सरकार मनरेगा की जगह यह नया कानून लेकर आई थी। विपक्ष इस कानून के नाम को लेकर आपत्ति जता रहा है, क्योंकि इसमें महात्मा गांधी का नाम शामिल नहीं है। इसके साथ ही विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इस योजना के वित्तीय बोझ का एक हिस्सा राज्यों पर डाल दिया है। इसी को लेकर विपक्ष लगातार विरोध दर्ज करा रहा है।
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