Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा। पुरुषोत्तम मास के अवसर पर गोकुल धाम, रुक्मणी विहार, श्रीधाम वृंदावन में संजीव कृष्ण ठाकुर महाराज के सान्निध्य में समर्पण गौशाला, गोवर्धन के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा श्रीकृष्ण रस महोत्सव के चतुर्थ दिवस की कथा में कथावाचक ने सर्व प्रथम भगवान वामन का पावन चरित्र समुपस्थित प्रभु प्रेमियों के सम्मुख रखा। कथावाचक ने बताया कि आपके जीवन में अर्जन तो जरूर होना चाहिए मगर कभी सत्कर्म और सेवा कर्म करने का अवसर मिले तो लक्ष्मी को प्रभु की दासी जानकर विसर्जन भी होना ही चाहिए। धन कमाना भी तभी सफल है जब वह धर्म के कार्यों में लगाया जाए।
धर्म को देखना हो तो प्रभु श्री राम के जीवन को देखना चाहिए
प्रभु श्री राम का जीवन चरित्र बड़ी ही व्यावहारिकता के साथ प्रस्तुत किया गया। प्रभु श्री राम जैसा निर्विवाद व्यक्ति कभी कभी इस धरा धाम पर प्रकट होते हैं। राम विवाद के नहीं अपितु संवाद के विषय हैं। रामो विग्रह वान धर्मः अर्थात् धर्म को देखना हो तो प्रभु श्री राम के जीवन को देखना चाहिए। एक बेटे का धर्म, एक पुत्र का धर्म, एक पति का धर्म, एक पिता का धर्म, एक भाई का धर्म और एक आदर्श राजा का धर्म जानना है तो प्रभु श्री राम का जीवन देखना होगा।रामायण और रामकथा केवल पढ़ने का विषय नहीं अपितु रामायण तो जीने का ग्रंथ है।
ब्रज के रसिक एवं युवान कथा प्रवक्ता इंद्रेश महाराज का भी मंगलमय आगमन एवं आशीर्वचन कथा मध्य में सभी प्रभु प्रेमियों को प्राप्त हुआ। कथा में कृष्ण जन्म प्रभु के मंगलमय भजनों पर झूमकर बड़े ही आनंद और धूमधाम के साथ मनाया गया। पश्चात आरती और प्रसाद वितरण के साथ आज की कथा का मंगलमय समापन हुआ।
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