अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान के रूप में आई राशि में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी और चोरी के दावों ने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस संवेदनशील मामले पर अब राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख स्तंभ रहे वरिष्ठ भाजपा नेता और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने चुप्पी तोड़ते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की पुरजोर वकालत की है।
आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: कटियार
अयोध्या पहुंचे विनय कटियार ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि श्री राम जन्मभूमि केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा, “दानराशि को लेकर जो भी आरोप सामने आ रहे हैं, उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि इतने बड़े स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो इसकी सच्चाई सामने आना अनिवार्य है। करोड़ों भक्तों की श्रद्धा के साथ जुड़े इस विषय पर किसी भी प्रकार का संशय ठीक नहीं है।”
जांच और जवाबदेही पर जोर
यद्यपि विनय कटियार ने यह स्पष्ट किया कि वे मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं का हिस्सा नहीं हैं और फिलहाल उनके पास पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने ट्रस्ट को आत्म-समीक्षा करने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा: दानराशि के विवाद का पारदर्शी समाधान होना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का ट्रस्ट पर भरोसा बना रहे। कटियार ने सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि अनियमितता या लापरवाही के आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सके। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना आवश्यक है।
दान और सुरक्षा का तंत्र
प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ही अयोध्या में भक्तों का तांता लगा हुआ है और मंदिर में प्रतिदिन भारी मात्रा में दानराशि एकत्रित हो रही है। ट्रस्ट की ओर से दान की गिनती बैंक कर्मियों और नियुक्त कर्मचारियों की निगरानी में सीसीटीवी कैमरों के बीच की जाती है। इन सुरक्षा दावों के बीच चोरी की खबरें उठना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
ट्रस्ट की चुप्पी और संशय
विनय कटियार के इस बयान के बाद अयोध्या में हलचल बढ़ गई है। हालांकि, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संतों और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए ट्रस्ट को जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि भक्तों के मन में उत्पन्न भ्रम दूर हो सके।
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