सूरत (गुजरात) [भारत], जनवरी 9: सार्वजनिक यूनिवर्सिटी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल (SU-RDC) द्वारा 5 और 6 जनवरी, 2026 को “R&D Awareness and Capacity Building” विषय पर दो दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया था। शिक्षा क्षेत्र के अध्यापकों, शोध विद्वानों, विद्यार्थियों तथा उद्योग जगत से जुड़े पेशेवरों में शोध और विकास के प्रति जागरूकता फैलाना तथा उनकी शोध क्षमताओं को मजबूत बनाना इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य था।
वर्कशॉप का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। उद्घाटन सत्र में सार्वजनिक यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष श्री आशिष वकील तथा प्रोवोस्ट डॉ. किरण पंडया, STPL (Sahajanand Technologies Private Limited) के डायरेक्टर श्री राहुल गायवाला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उपस्थित अतिथियों ने शोध आधारित शिक्षा और यूनिवर्सिटी में R&D संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वर्कशॉप के पहले सत्र में IIT मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अर्णव भावसारे ने R&D प्रक्रिया, प्रोजेक्ट प्रस्ताव तैयार करने की विधि, फंडिंग के विभिन्न स्रोतों और शोध के लिए उपलब्ध संसाधनों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
निरमा यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ऑफ साइंस के प्रोफेसर डॉ. विजय कोठारी ने शोध अनुदान के लिए प्रस्ताव कैसे तैयार किया जाए, फंडिंग एजेंसियों की अपेक्षाएं और सफल प्रस्ताव के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। वहीं, एम.एस. विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. देवरशी गज्जर ने शोध प्रस्ताव लेखन और सबमिशन प्रक्रिया के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी।
इसके अलावा IP Secure Services के संस्थापक डॉ. (ER.) अनिश गांधी द्वारा बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), पेटेंट फाइलिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और शोध परिणामों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया।
SVNIT, सूरत के प्रोफेसर डॉ. धीरन पटेल ने भारत के लिए डीप-टेक इनोवेशन की संभावनाओं और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट श्री अंकुर रावल तथा सीनियर मैनेजर श्री पार्थ नाइक ने उत्पादन जीवनचक्र विषय पर विशेष रूप से स्टेंट मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। SVNIT के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. हर्षित दवे ने शोध अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया, उसकी व्यापकता और स्वीकृति की विधियों के बारे में जानकारी दी।
वर्कशॉप के अंतिम सत्र में सहजानंद टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर श्री राहुल गायवाला ने टेक्नोलॉजी कमर्शियलाइजेशन, लाइसेंसिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया।
वर्कशॉप के अंतर्गत R&D प्रक्रिया, स्पॉन्सर्ड और सीड ग्रांट प्रस्ताव, डीप-टेक इनोवेशन की चुनौतियां, प्रोटोटाइप विकास और उसकी वैधता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। इस वर्कशॉप से शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को शोध क्षेत्र में नई दिशा और प्रेरणा मिलने की अपेक्षा व्यक्त की गई है।
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