आगरा: जनकपुरी महोत्सव के नाम पर जनता की जेब से निकले ₹4.6 करोड़, पर सड़क 24 घंटे में ही उखड़ गई। क्या ये सिर्फ़ एक सड़क का भ्रष्टाचार है या हमारी पूरी व्यवस्था का नंगा नाच?
नमस्कार, दोस्तों! क्या आपने कभी किसी सड़क को चाबी से खोदते हुए देखा है? नहीं देखा, तो आगरा के कमला नगर आइए, आपको ये ऐतिहासिक नजारा देखने को मिल जाएगा। यहां जनकपुरी महोत्सव की तैयारियों के नाम पर ₹4.6 करोड़ फूंक दिए गए और नतीजा ये कि जो सड़क 24 घंटे पहले बनी थी, वह चाबी से खोदने पर ऐसी उखड़ने लगी, जैसे कोई रेहड़ी-पटरी वाला हलवा हो।
ये सड़क है या मजाक?
आगरा में इस बार का जनकपुरी महोत्सव कमला नगर में हो रहा है। शहर के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन की तैयारियों के लिए नगर निगम ने ₹4.6 करोड़ का बजट निकाला, ताकि सड़कों को सुधारकर चमकाया जा सके। इसमें हॉट मिक्स से सड़क बनाने का काम भी शामिल था। लेकिन जिस तरह से काम हुआ है, उसे देखकर लगता है कि ये विकास नहीं, बल्कि जनता के पैसों का खुलेआम मजाक उड़ाया गया है।
क्या ये विकास कार्य थे या सिर्फ़ पैसों की बंदरबांट? क्या ₹4.6 करोड़ की रकम इसलिए खर्च की गई थी कि जनता अपने ही पैसे से बनी सड़क को चाबी से खोदकर उसकी गुणवत्ता का प्रमाण दे?
एक स्थानीय निवासी नितिन कोहली ने तो वीडियो बनाकर दिखा दिया कि सड़क पर काली गिट्टी डालकर जल्दबाजी में काम निपटाया गया। लाल गिट्टी, जो सड़क को मजबूती देती है, वो गायब थी। अब सवाल ये है कि क्या हमारे इंजीनियरों को पता नहीं है कि सड़क कैसे बनती है? या ये जानबूझकर किया गया ताकि कल को फिर से उसी सड़क पर पैसा खर्च किया जा सके? क्या यह एक चक्रव्यूह है जिसमें जनता फंसती जाती है और नेता-अफसर मालामाल होते जाते हैं?
जांच के आदेश… और फिर वही ढाक के तीन पात
जब मामला गरमाया और लोगों का गुस्सा फूटा, तो नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने जांच के आदेश दे दिए। जूनियर इंजीनियर से सैंपल भी लिए गए। हर बार की तरह जांच होगी, रिपोर्ट बनेगी, कुछ छोटे कर्मचारी सस्पेंड होंगे और फिर सब कुछ शांत हो जाएगा। क्या आपको लगता है कि इस बार कुछ अलग होगा? क्या ₹4.6 करोड़ के भ्रष्टाचार के लिए कोई बड़ा अधिकारी या नेता जिम्मेदार नहीं होगा? क्या जांच सिर्फ़ लीपापोती के लिए है ताकि जनता का गुस्सा शांत हो जाए?
क्या किसी के पास इस बात का जवाब है कि एक शहर में, जहां ऐतिहासिक इमारतों को विश्व धरोहर का दर्जा मिला है, वहां बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता इतनी खराब क्यों है? क्या यह सिर्फ़ आगरा की कहानी है या पूरे देश की? जब ₹4.6 करोड़ से बन रही सड़क 24 घंटे भी नहीं टिक सकती, तो फिर ₹4.6 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स का क्या हाल होता होगा?
आपको बता दें यह ‘चमत्कार’ आगरा के कमला नगर क्षेत्र में हुआ है। जनकपुरी महोत्सव के लिए चल रहे विकास कार्यों के दौरान, विशेष रूप से IDBI बैंक से जैन पार्क तक, कमला नगर सेंट्रल बैंक रोड पर और अन्य लिंक रोड्स पर ये घटिया काम हुआ है। ठेकेदार ने सड़क बनाने में काली गिट्टी का इस्तेमाल किया और लाल गिट्टी को गायब कर दिया, जिससे सड़क में कोई मजबूती नहीं रही। इस काम को नगर निगम के ठेकेदारों ने किया, लेकिन जिम्मेदारी किस पर डाली जाएगी, ये अभी तक साफ नहीं है। क्या यह सिर्फ़ ठेकेदार की गलती है या इसमें पूरी व्यवस्था शामिल है?
क्या इस बार भी वही होगा- जनता का पैसा बर्बाद होगा, नेता और अफसर मौज करेंगे, और फिर कोई नया उत्सव आएगा, और फिर कोई नई सड़क बनेगी, जो 24 घंटे में ही उखड़ जाएगी। क्या हमारे लोकतंत्र का यही असली चेहरा है? क्या हम सिर्फ़ तमाशबीन बनकर ये सब देखते रहेंगे?
-मोहम्मद शाहिद की कलम से
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