श्री गांधी हायर सेकेंडरी स्कूल मलपुरा आगरा की हर ईंट में संघर्ष, शिक्षा, संस्कार, सेवा की गाथा, 41 वर्ष पूर्व हुई स्थापना और मान्यता की रोचक कहानी
भव्य वार्षिकोत्सव में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया
नृत्य और विविध वेश का शानदार प्रदर्शन, तालियां बजाते रहे अभिभावक
सफाई कर्मचारी अम्मा का सम्मान देख हर कोई गद्गद् हो गया, नई पहल
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat. आगरा- जगनेर रोड पर श्री गांधी हायर सेकेंडरी स्कूल मलपुरा है। आगरा की ओर से चलें तो मलपुरा थाने से थोड़ा से आए बाएं हाथ पर सड़क से थोड़ा अंदर जाकर है। स्कूल का 41वां वार्षिकोत्सव का समापन समारोह भव्यता से मनाया। बच्चों ने नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दीं। विविध वेश प्रतियोगिता में जब बच्चे कान्हा, राधा, सीता, झांसी की रानी, टीचर, डॉक्टर, सुदामा, भारत माता, परी आदि के वेश में आए तो हर कई अपलक देखता रह गया।
इस विद्यालय की स्थापना और मान्यता की कहानी बड़ी रोचक है। देखने में तो विद्यालय भवन प्रभावित नहीं करता है, लेकिन इसकी हर ईंट संघर्ष, शिक्षा, संस्कार और सेवा की कहानी कह रही है। घोषणा की गई कि इस वर्ष से कक्षाओं को डिजिटल कर रहे हैं। अगले पांच वर्ष में सीबीएसई से मान्यता लेंगे और इंटरमीडिएट तक करेंगे। चयनित बच्चों की फीस भी माफ करेंगे।

प्रतिभा का सम्मान और उज्ज्वल भविष्य की कामना
मुख्य अतिथि, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. भानु प्रताप सिंह, विशिष्ट अतिथि और पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. श्रीकांत कुलश्रेष्ठ, अध्यक्षता कर रहे भारत विकास परिषद के संरक्षक न्याय दत्त शर्मा और क्रीड़ा भारती के मोहित वर्मा ने विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
41 वर्ष बाद भी साख कायम
बच्चों को सलाह दी गई कि वे जमकर पढ़ें और खेलें भी। अतिथियों ने कहा कि विभिन्न प्रतियोगिताएं कराने से यह स्पष्ट हो गया कि विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सन्नद्ध है। यही कारण है कि 41 वर्ष बाद भी विद्यालय की साख है। आज जबकि विद्यालयों के भवन आकर्षक हैं लेकिन श्री गांधी हायर सेकेंडरी स्कूल में अध्यापन अति आकर्षक है।

संस्थापक श्री शैलेंद्र कुमार मित्तल की विरासत
विद्यालय की स्थापना शिक्षक श्री शैलेंद्र कुमार मित्तल ने 41 वर्ष पूव की थी। उनका सदेच्छा का सम्मान 41 वर्ष बाद भी जारी है। उनकी पत्नी श्रीमती सरोज मित्तल ने विद्यालय को चलाए रखने के लिए तन मन धन लगा रखा है। विद्यालय समन्वयक हैं प्रसिद्ध वेलनेस गुरु जितेंद्र मित्तल। उन्होंने विद्यालय स्थापना की जो कहानी सुनाई, वह बड़ी रोचक है। हम उस कहानी को यथावत प्रस्तुत कर रहे हैं-

स्थापना की कहानी
“मेरे पापा मेरा प्रवेश दिलाने के लिए स्कूल में गए। स्कूल में मुझसे कहा कि सिर के ऊपर हाथ ले जाकर कान पकड़ो। मैं नहीं पकड़ सका। इससे यह सिद्ध हुआ कि मेरी उम्र छह साल की नहीं हुई थी और मुझे प्रवेश नहीं मिला। इसके बाद मेरे पिता ने मुझे पढ़ाने के लिए मास्टर रख दिया। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या 50 हो गई और स्कूल शुरू हो गया।”
मान्यता देने आए अधिकारी के सामने गोबर
“41 वर्ष पूर्व स्थापित यह विद्यालय अकोला क्षेत्र का पहला मान्यता प्राप्त प्राइवेट विद्यालय था। तीन साल में ही 42 गांवों के 1400 से अधिक छात्र हो गए। आगरा से मान्यता देने के लिए बीएसए आए। सरकारी विद्यालयों में छात्र कम हो गए। यह देखकर आगरा से निरीक्षण के लिए आए। जैसे ही विद्यालय में घुसे तो भैंस ने गोबर कर दिया। उनके वस्त्र खराब हो गए। यह देख उनके साथ आए बाबू ने कहा कि यह कैसा विद्यालय बनाया है, जहां भैंस गोबर कर रही है। इस पर अधिकारी ने कहा, जो व्यक्ति भैंसों के बीच स्कूल चलाने की क्षमता रखता है, उसके साथ बड़ा होने वाला है। फिर वे खड़े-खड़े ही विद्यालय को कक्षा आठ की मान्यता दे गए। उन्होंने कोई बात नहीं पूछी, सिर्फ स्कूल का नाम पूछा। उस समय अकोला विकास खंड में केवल तीन ही स्कूलों को कक्षा 8 तक की मान्यता थी। विद्यालय के संस्थापक औऱ मेरे पिताजी शैलेंद्र कुमार मित्तल ने स्कूल के लिए जगह सड़क से थोड़ी अंदर ली ताकि बच्चों को नुकसान न हो।”

डॉ. मुकेश अग्रवाल ने दी मान्यता
“स्कूल को 1999 में हाईस्कूल की मान्यता मिली। तब डॉ. मुकेश अग्रवाल जिला विद्यालय निरीक्षक थे। (आज वे संयुक्त निदेशक शिक्षा हैं)। जब वे आए तो विद्यालय को झंडी लगाकर सजाया गया था। उन्होंने कहा कि ये क्या धर्मशाला है, तब पापा ने कहा कि नहीं, हमें खुशी हो रही है कि 10वीं की मान्यता मिल रही है. इसलिए सजाया गया है। डॉ. मुकेश अग्रवाल संत बुद्धाराम इंटर कॉलेज में गए और वहां के प्रिंसिपल से कहा कि मलपुरा में तुम्हारा कंपटीटर आ गया है और उसे तुम बीट नहीं कर पाओगे।”
चार दशक की सफलता
“40 सालों में स्कूल में पढ़ने वाले छात्र आईअएस, पीसीएस, लेखपाल, अमीन, पुलिस अधिकारी बने हैं। इस समय तो बच्चे यहां पढ़ रहे हैं, उनके मम्मी औऱ पापा भी यहीं पढ़कर गए हैं। स्काउटिंग में हमारे बच्चे राष्ट्रपति पदक लेकर आए हैं। हमारी स्काउटिंग की टीम को जजमेंट में लगाया जाता था। राष्ट्रपति पदक विजेता बच्चे भी हैं।”

घोषणाएँ और सम्मान, नए संकल्प
कार्यक्रम में श्री जितेंद्र मित्तल ने घोषणा की—
- कक्षाओं को डिजिटल बनाया जाएगा
- पाँच वर्षों में CBSE मान्यता ली जाएगी
- विद्यालय इंटरमीडिएट स्तर तक विस्तारित होगा
- चयनित मेधावी विद्यार्थियों की फीस माफ होगी
सम्मानित होने वाले व्यक्तित्व
न्यायदत्त शर्मा, डॉ. भानु प्रताप सिंह, डॉ. श्रीकांत कुलश्रेष्ठ, श्रीमती सरोज मित्तल, अमर उजाला के पत्रकार सोनवीर सिंह चाहर, हिंदुस्तान के पत्रकार चोब सिंह सक्सेना, भास्कर के संवाददाता पवन कुशवाहा, संजय प्रजापति और कन्हैया जी, प्रधानाचार्य विष्णु शर्मा, श्री जितेंद्र (स.अ), श्रीमती ममता (स. अ), श्रीमती बबीता (स. अ), श्रीमती गीता शर्मा (स. अ), कु. नीरज (स. अ), कु. शिखा (स. अ), कु. उपासना (स. अ) , कु. कल्पना (स. अ), कु .लक्ष्मी (स.अ.) और सफाई कर्मचारी अम्मा। अंत में बच्चों को उपहार और मिष्ठान्न के साथ विदा किया गया।

संपादकीय—मुख्य अतिथि के रूप में मेरी अनुभूति
श्री गांधी हायर सेकेंडरी स्कूल, मलपुरा के 41वें वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होना मेरे लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा। कार्यक्रम में बच्चों की जो प्रतिभा मैंने देखी—वह अद्वितीय, प्रखर और आशा से भरी हुई थी। इन नन्हें–मुन्नों की मंच–प्रस्तुतियाँ, उनकी लगन, आत्मविश्वास और ऊर्जा देखकर मुझे विश्वास हुआ कि यह विद्यालय न केवल शिक्षा दे रहा है, बल्कि चरित्र भी गढ़ रहा है।
41 वर्षों तक लगातार उत्कृष्टता की यात्रा पर चलना किसी संस्था के लिए साधारण उपलब्धि नहीं, बल्कि एक तपस्या है। इस तपस्या के वाहक हैं—विद्यालय का प्रबंधतंत्र, शिक्षक–गण और सबसे बढ़कर वे लोग जिन्होंने इस विद्यालय को जन्म दिया।
मैं स्वर्गीय शैलेंद्र कुमार मित्तल जी को हृदय से नमन करता हूँ—उन्होंने जिस संकल्प, त्याग और आत्मविश्वास के साथ भैंसों के बीच भी विद्यालय की नींव रखी, वह आज के युग में लगभग असंभव-सा प्रतीत होता है। शिक्षा के प्रति उनका समर्पण आज भी इस संस्था की धड़कनों में मौजूद है।
उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सरोज मित्तल को मेरा गहरा प्रणाम और अति साधुवाद—जिन्होंने तन–मन–धन से विद्यालय को संभाले रखा, उसे आगे बढ़ाया, और हर चुनौती के बीच एक माँ की तरह इस संस्था को पोषित किया।
ऐसी महिलाएँ किसी संस्था की आत्मा होती हैं। विद्यालय का प्रबंधतंत्र, शिक्षक–समुदाय और सहयोगी दल—सभी बधाई के पात्र हैं। उनकी मेहनत ही इस विद्यालय की वास्तविक संपत्ति है।
आज के समारोह ने यह सिद्ध किया कि यह विद्यालय अपने मूल्यों, संस्कारों और संघर्षशीलता के साथ भविष्य की ओर दृढ़ता से बढ़ रहा है। यहाँ के बच्चे केवल छात्र नहीं—बल्कि राष्ट्र की आने वाली संभावनाएँ हैं।
मैं इस अद्वितीय संस्था, इसके संस्थापक परिवार, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को हृदय से शुभकामनाएँ देता हूँ कि यह प्रकाश–दीप आने वाले अनेक वर्षों तक इसी प्रकार उज्ज्वल और प्रज्वलित बना रहे। विद्यालय सम्न्वयक और वैलनेस गुरु जितेंद्र मित्तल जी का धन्यवाद कि मुझे मुख्य अतिथि का गौरव प्रदान किया।
डॉ. भानु प्रताप सिंह, संपादक

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