आगरा। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आगरा दौरे के दौरान सर्किट हाउस में आयोजित जनप्रतिनिधियों की समीक्षा बैठक उस समय तीखे तेवरों वाली बन गई, जब मंच के सामने ही पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आ गई। विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आगरा कमिश्नरेट पुलिस का रवैया निरंकुश हो गया है और स्थिति यह है कि कई अधिकारी न तो मिलने को तैयार हैं और न ही जनप्रतिनिधियों के फोन तक उठाते हैं।
पुलिस कार्यशैली पर गंभीर आरोप
बैठक में किरावली और जीवनी मंडी से जुड़े मामलों को विशेष रूप से उठाया गया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जनता की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई के बजाय पुलिस मनमानी रवैया अपनाती है, जिससे आम नागरिकों का भरोसा कमजोर हो रहा है। कई मामलों में पीड़ितों को महीनों तक थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाता।
जिला जेल की व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल
समीक्षा बैठक में जिला जेल की अव्यवस्थाओं को लेकर भी कड़े सवाल रखे गए। जनप्रतिनिधियों ने जेल प्रशासन पर बंदियों की सुविधाओं, मुलाकात व्यवस्था और समग्र प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर आरोप लगाए और इन समस्याओं से उपमुख्यमंत्री को अवगत कराया।
डिप्टी सीएम ने दिए सख्त निर्देश
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि एसआईआर (Special Investigation/Review) से जुड़े कार्यों में पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता बरती जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बेहतर किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि कानून-व्यवस्था और जनसुनवाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनप्रतिनिधियों की व्यापक मौजूदगी
बैठक में सांसद राजकुमार चाहर, कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, भगवान सिंह कुशवाहा, डॉ. जीएस धर्मेश, छोटेलाल वर्मा, डॉ. धर्मपाल सिंह, महापौर हेमलता दिवाकर, एमएलसी विजय शिवहरे सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। साथ ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस कमिश्नरेट के जिम्मेदार अफसर भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक के बाद यह संकेत स्पष्ट हैं कि आगरा में पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली को लेकर सरकार अब सख्ती के मूड में है और आने वाले दिनों में जवाबदेही बढ़ाई जा सकती है।
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