नई दिल्ली/आगरा। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता के.सी. जैन के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को सड़क हादसों में घायल होने वालों के लिए एक सप्ताह में देशव्यापी इलाज योजना लागू करने के आदेश दिए हैं।
प्रतिवर्ष लगभग 4,50,000 लोग सड़क हादसों में घायल हो जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में गोल्डन आवर्स में इलाज न पाये जाने के कारण मृत्यु हो जाती है यद्यपि मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162 (2) में यह प्रावधान है कि केन्द्र सरकार घायलों के इलाज के लिये योजना बनायेगी।
इसको लेकर ताजनगरी निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका सं0 202442 वर्ष 2023 दायर की थी, जिस पर सुनवाई उपरान्त विगत आठ जनवरी को केन्द्र सरकार को 14 मार्च तक योजना बनाने के आदेश दिये गये थे। जब यह योजना नियत दिनांक तक नहीं बन सकी तो सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के सचिव को सुप्रीम कोर्ट ने नौ अप्रैल को अपने आदेश द्वारा सोमवार 28 अप्रैल को तलब कर लिया।
सचिव वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए और सुप्रीम कोर्ट में अपनी मजबूरी को बताया कि जनरल इन्श्योरेन्स काउंसिल की रूकावट के कारण यह योजना लागू नहीं की जा सकी है। न्यायालय ने अपना सख्त रुख दिखाते हुए कहा कि धारा 162(2) के प्रावधान सरकार के ही हैं और उनको लागू हुए तीन वर्ष व्यतीत होने के उपरान्त भी अभी तक योजना क्यों नहीं बन सकी है। न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए केन्द्रीय सचिव ने कहा कि एक सप्ताह के अन्दर यह योजना देशव्यापी रूप से लागू कर दी जायेगी।
जनरल इन्श्योरेन्स काउंसिल ने भी अपनी याचिका को वापस ले लिया। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित योजना को 09 मई तक न्यायालय में प्रस्तुत किया जाये जिसके अनुपालन को लेकर न्यायालय में 13 मई को सुनवाई की जायेगी। न्यायालय ने आदेश में यह भी लिखा कि केन्द्र सरकार योजना को समय पर लागू न करने के लिए क्षमा मांगती है। योजना लागू होने पर सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़े राहत के रूप में होगी।
सुनवाई न्यायमूर्ति अभय एस ओका एवं उज्जवल भुआन की पीठ द्वारा की गयी, जिसमें अधिवक्ता केसी जैन ने स्वयं अपने पक्ष को प्रस्तुत किया। न्यायमित्र गौरव अग्रवाल एवं केन्द्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी उपस्थित थे।
सोमवार को तीन याचिकाओं की सुनवाई हुई। यह तीनों याचिकाएं अधिवक्ता जैन द्वारा स्वयं प्रस्तुत की गयीं थीं। ये याचिकाएं सड़क पीड़ितों को अन्तरिम राहत दिये जाने और अनिवार्य बीमा क्षेत्र में सुधार के लिए दाखिल की गई हैं। के सी जैन ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आएगा। जब घायल को गोल्डन आवर्स में इलाज मिलेगा, पीड़ित परिवारों को तुरंत सहायता मिलेगी।
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