आगरा। “पहले दरोगा ने सिपाहियों की तरफ मुस्कुराकर देखा, फिर एक के बाद एक पांच गोलियों की आवाज़ आई। जो पांच किलोमीटर तक सबने सुनी। अगले दिन उसी हाई वे पर एक पच्चीस साल का युवक मोबाइल देख रहा था, एक और एनकाउंटर, कहते हुए उसने मुस्कुराकर अपने सहयात्री पर निगाह डाली। सहयात्री ने मोबाइल पर निगाह डाली, और कौतुहल वश हाथ से मोबाइल लेकर पिक्चर जूम करने लगा। जैसे किसी को पहचानना चाहता हो।”
ये अंश है वरिष्ठ कथाकार शक्ति प्रकाश की कहानी “सो एंड सो” का, जो आज यहां किस्सा कहानी -8 में अपनी कहानी का पाठ कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन *रंगलीला* और नई दिल्ली की कहानी पत्रिका *कथादेश* द्वारा *शीरोज़ हैंग आउट* में किया गया था।रंगलीला के निर्देशक अनिल शुक्ल ने इस कार्यक्रम की प्रगति और इसके उद्देशों पर प्रकाश डाला। कथा पाठ से पूर्व ‘कहानी और समाज का सच’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन भी हुआ, जिसमें विषय प्रवर्तन केंद्रीय हिंदी संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो.रामवीर सिंह ने किया। उन्होंने कहा भारतीय कहानियों में सच की मुंशी प्रेमचन्द ने की। उन्होंने मेरी और आपकी कहानी कहनी शुरू की, बाद में दूसरे कहानीकारों ने भी प्रेमचन्द की धारा को अपनाया।
अध्यक्षता कथाकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता रामनाथ शर्मा ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा इस कहानी में यथार्थ पूरा है। अस्सी के दशक में लेखक राजनीति से दूरी बनाए रखता था, आज लेखक राजनीति पर अपनी प्रभावी प्रतिक्रिया देता है। शक्ति प्रकाश द्वारा कहानी के पाठ के बाद उनसे मौजूद सुधी श्रोताओं ने सवाल पूछते हुए अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया।
आरबीएस कॉलेज के प्रो. इंद्र कुमार यादव ने कहा कि कहानी में मौजू विषयों को उठाया गया है। श्री कृष्ण ने कहा कहानी मौजदा लोकतंत्र की चुनौतियों को रेखांकित करती है। सीमान्त साहू ने भी कहानी में जन जन की आवाज़ को व्यक्त करने की सराहना की। ब्रिगेडियर विनोद दत्ता ने कहा आज उपभोक्तावादी संस्कृति ने सब कुछ इंस्टेंट पाने की चाह बढ़ा दी है। रमेश पंडित ने कहा कहानी को सुनने के बाद लगा इसकी भाषा देसज थी, जो आम आदमी तक साहित्य को पहुंचाने के लिये बहुत जरूरी है। विशाल रियाज ने कहा आवाज़ दबाने के दौर में कहानी आम आदमी की आवाज़ को उठाती दिखती है।
रमेश पंडित ने धन्यवाद दिया। संचालन अर्जुन सवेदिया ने किया। कार्यक्रम में आकाशवाणी आगरा के पूर्व निदेशक नीरज जैन, शीरोज़ हैंग आउट के अजय तोमर, रामभरत उपाध्याय, डॉ. महेश धाकड़, डॉ. मधु भारद्वाज, वंदना तिवारी, मालती कुशवाह, अमरजीत सिंह, ज्योति खंडेलवाल, विशाल झा, मनु भाई पंड्या, दिनेश, सिद्धेश अरोरा, मोहम्मद आरिफ, हिना, शिव नारायण सिंह, अजय पचौरी, रोमी चौहान आदि मौजूद थे।
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