गंभीर आर्थिक संकट की वजह से मुश्किल में घिरे श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे ने नए मंत्रिमंडल को नियुक्त किया है. नई कैबिनेट में 17 मंत्री शामिल किए गए हैं.
अप्रैल के पहले सप्ताह में ही सरकार विरोधी प्रदर्शन की वजह से पूरी कैबिनेट ने इस्तीफ़ा दे दिया था. राजपक्षे ने नई सरकार बनाने में विपक्षी पार्टियों से सहयोग मांगा था लेकिन सभी ने इससे इनकार कर दिया.
विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने की वजह से श्रीलंका में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो रही है और भोजन, दवाइयाँ, ईंधन की भी कमी हो गई है. इसकी वजह से श्रीलंका की जनता राष्ट्रपति राजपक्षे का इस्तीफ़ा मांग रही है.
श्रीलंका 1948 में ब्रिटेन से आज़ादी पाने के बाद से अब तक के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है.
विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति के नए कैबिनेट नियुक्त करने के फैसले का विरोध किया है. विपक्ष का कहना है कि कैबिनेट में गैर-अनुभवियों को मंत्री बनाया जा रहा है.
सोमवार से एक सप्ताह के लिए स्टॉक एक्सचेंज में कामकाज को रोक दिया गया है.
श्रीलंका में इसी माह से विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं. प्रदर्शनों को रोकने के लिए शुरुआत में श्रीलंका सरकार ने देश में आपातकाल लागू कर दिया था और सोशल मीडिया को भी बैन कर दिया गया था. हालांकि, बाद में आपातकाल हटा लिया गया लेकिन विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है.
-एजेंसियां
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