प्रयागराज: नाबालिग बटुकों के यौन शोषण के गंभीर आरोपों में घिरे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें अब और बढ़ती नजर आ रही हैं। पुलिस द्वारा कराई गई बटुकों की मेडिकल जांच की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित बटुकों के साथ जबरन यौन कृत्य और उत्पीड़न की पुष्टि हुई है, जो इस मामले को और भी संवेदनशील बना देता है।
गुरु दीक्षा के नाम पर प्रताड़ना का आरोप
पीड़ित बटुकों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद प्रकाश उपाध्याय पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। बटुकों का कहना है कि गुरु दीक्षा के नाम पर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया जाता था। उन्हें रसूखदार बाहरी लोगों और ‘सफेदपोश’ व्यक्तियों के सामने पेश किया जाता था, जहाँ उनके साथ गलत काम होते थे। विरोध करने पर उन्हें डराने-धमकाने और चुप रहने के लिए मजबूर किया जाता था।
मठ में अब भी फंसे हैं कई बच्चे
पीड़ितों के अनुसार, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों से बच्चों को मठ में लाया जाता था। आरोप है कि करीब 20 अन्य बटुक भी इसी तरह के उत्पीड़न का शिकार हुए हैं, जो डर के कारण सामने नहीं आ पा रहे हैं। बटुकों ने बताया कि माघ मेले के दौरान मौका पाकर वे मठ से भाग निकले और दूसरे धार्मिक नेता की शरण लेकर पूरी सच्चाई बताई।
लैपटॉप में मौजूद हैं ‘डिजिटल’ साक्ष्य: आशुतोष ब्रह्मचारी
मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया है कि उनके पास आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने एक लैपटॉप दिखाते हुए कहा कि इसमें नाबालिगों के यौन शोषण से जुड़े फोटो और वीडियो मौजूद हैं। साथ ही, उन्होंने आश्रम में साक्ष्य मिटाने और करीब 4 करोड़ रुपये के घोटाले का भी गंभीर आरोप लगाया है।
कानूनी कार्रवाई जारी
प्रयागराज के झूंसी थाने में स्वामी और उनके शिष्यों के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। पुलिस का कहना है कि विवेचना जारी है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी सघन जांच की जा रही है। मामले की अगली दिशा अब कोर्ट के निर्देशों पर टिकी है।
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