सीतापुर। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी उत्तर प्रदेश विधानसभा यात्रा के दौरान सीतापुर में राम मंदिर ट्रस्ट और सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। मंगलवार सुबह मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी प्रकरण और उसके बाद हुई एसआईटी (SIT) जांच की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह व्यक्त किया।
’निष्पक्ष जांच पर संदेह’
शंकराचार्य ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट और जांच एजेंसी दोनों ही सरकार के अधीन हैं। ऐसे में ‘डबल इंजन’ सरकार में निष्पक्ष जांच का दावा करना जनता को भ्रमित करने जैसा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब जांच उसी व्यवस्था के अंतर्गत हो, जिस पर आरोप लग रहे हों, तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में शंकाएं पैदा होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि राम मंदिर स्थापना में धर्म और शास्त्रों की अनदेखी की गई है, जिसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं।
’इस्तीफा सिर्फ आग को डाइवर्ट करने की चाल’
चंपत राय के इस्तीफे पर टिप्पणी करते हुए शंकराचार्य ने इसे “आग के ऊपर छींटा मारने जैसा” करार दिया, ताकि आग की लौ कुछ कम हो सके और जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने कहा, “जब तक इस्तीफे के दस्तावेज सार्वजनिक नहीं होते और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती, तब तक आस्था पर लगी चोट नहीं भरेगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन लोगों को नई नियुक्तियां दी जा रही हैं, उनकी विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न हैं क्योंकि वे भी पार्टी के कार्यकर्ता ही हैं।
गौ रक्षा और विधानसभा यात्रा का संकल्प
शंकराचार्य ने बताया कि उनकी 403 विधानसभाओं की यात्रा का मुख्य उद्देश्य ‘गौ माता’ की रक्षा के लिए जनसमर्थन जुटाना है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि आगामी चुनावों में अन्य सभी मुद्दों को छोड़कर गौ रक्षा को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने दावा किया कि लाखों लोगों ने पहले ही इसका संकल्प ले लिया है।
राजनीति और धर्म
सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जहां भी राजनीतिक लाभ के लिए धर्म और शास्त्रों की अवहेलना होती है, वहां नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परंपराओं की अनदेखी जारी रही, तो इसके और भी गंभीर परिणाम सामने आएंगे।
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