मुंबई (अनिल बेदाग)। भारत में हरित इस्पात (ग्रीन स्टील) उत्पादन को गति देने में स्क्रैप अब सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल के रूप में उभर रहा है। एमजंक्शन द्वारा आयोजित 12वें इंडियन स्टील मार्केट्स कॉन्फ्रेंस में उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि इस्पात ऐसी सामग्री है जिसे बार-बार रीसायकल किया जा सकता है, वह भी बिना गुणवत्ता खोए।
एमजंक्शन के प्रबंध निदेशक विनया वर्मा ने स्पष्ट कहा कि डीकार्बोनाइजेशन के प्रयासों में स्क्रैप की भूमिका निर्णायक होगी। भारत में इस समय 42 मिलियन टन स्क्रैप की वार्षिक खपत है, और इसमें हर साल 6% की निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के निदेशक सैयद जावेद अहमद ने सम्मेलन में कहा, “सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं, बल्कि उद्योग की रणनीति है।” कार्बन उत्सर्जन में कटौती और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन के लिए स्क्रैप के उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है।
स्क्रैप की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एमजंक्शन ने एआई-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो आपूर्ति श्रृंखला को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाएगा। कंपनी अब तक 120 स्थानों से 250 सप्लायर्स को जोड़ चुकी है और 15 राज्यों में 1.2 मिलियन टन स्क्रैप की आपूर्ति कर चुकी है।
उद्योग जगत इसे हरित इस्पात की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत के स्टील सेक्टर के डीकार्बोनाइजेशन की रीढ़ साबित हो सकता है।
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