राधास्वामी मत (Radhasoami Faith) के प्रवर्तक परम पुरुष पूरन धनी स्वामीजी महाराज (Soamiji Maharai) और परम पुरुष पूरन धनी हजूर महाराज (Hazur maharaj) ने इस नश्वर संसार में इस बात के लिए अवतार धारण किया कि जीवों का उद्धार हो सके। उन्होंने जीवों पर अनोखी दया लुटाई, बचन बानी के माध्यम से जीवों को अपने चरनों में खींचा, चेताया और उनका कारज बनाया। उन्होंने गुरुभक्ति और सतगुरु सेवा पर भी विशेष बल दिया और स्पष्ट रूप से कह दिया कि जब तक संपूर्ण जगत का उद्धार नहीं होता, धार की कार्यवाही निरंतर जारी रहेगी, वक्त के गुरु जीवों को चेताते रहेंगे। तब से लेकर आज तक यह सिलसिला जारी है और हजूर महाराज के घर हजूरी भवन, पीपल मंडी, आगरा (Hazuri Bhawan, Peepal mandi, Agra) में वर्तमान सतगुरु दादाजी महाराज (Radha Soami guru Dadaji maharaj) जीवों पर अपनी दया फरमा रहे हैं, उनका भाग जगा रहे हैं। दादा जी महाराज (Prof Agam Prasad Mathur former Vice chancellor Agra university) अपने सतसंग (Radhasoami satsang) में नित्य नवीन बचन फरमाते हैं जिससे यह जीव चेते और चरनों में लगे। उन्हीं बचनों में से कुछ अप्रकाशित वचन पुस्तिका ‘दादा की दात’ में जीवों के कल्याण के वास्ते दिए गए हैं। ये वचन न केवल जीवों के प्रीत प्रतीत को बढ़ाएंगे वरन उनका कारज भी बनाएंगे। यहां हम प्रस्तुत कर रहे हैं दादाजी महाराज के बचनों की श्रृंखला।
(75)
उस दिन की फ्रिक कीजिए, कौन संगी होगा, कौन बचाव करेगा जब जमदूत सामने खड़े होंगे और कर्मों की बही खुलती चली जाएगी। अभी तो पता नहीं लगता है आपको। अभी तो इंसान को होश नहीं हो रहा है लेकिन उस समय कौन मदद देगा? वो सब कर्म साफ करते हैं राधास्वामी दयाल कर्म की रेख पर मेख मारते हैं तब सम्हाल आती है, तब रक्षा होती है, इतना आसान नहीं है। इसलिए राधास्वामी दयाल की सच्ची सरन लीजिए। वह तो बस भक्ति को देखते हैं। कोई भी भक्त चाहिए। जैसे आपको गुरु की तलाश रहती है उसी तरह उनको भी यही तलाशती है कि कौन गुरुमुखता कर सकता है। अरे आप उनको क्या ढूंढ लेंगे वह तो स्वयं आपको ढूंढ कर निकाल लेते हैं और उसमें से कोई दुनियादारी का रिश्ता शामिल नहीं है, यह आपका गुरु का व्यक्तिगत रिश्ता है, राधास्वामी दयाल से आपका रिश्ता है। राधास्वामी नाम से आप पवित्र हो सकते हैं, आप उस नाम का जाप तो कीजिए। जब आपको ताकत मिल जाएगी तब उस नाम के वसीले से आप अपनी रक्षा कर पाएंगे।
(74)
तरह-तरह के विघ्न परमार्थ में डालने वालों की भी भीड़ कम नहीं है। माया ठगनी है और अपने प्रतिनिधियों को हर जगह छोड़ती है। इसलिए ऐसे लोगों से जो ढोंगी हैं और परमार्थ के नाम पर अपने पांचों अंगों में से किसी से भी फायदा उठाना चाहते हैं, वह संत सतगुरु राधास्वामी दयाल के निहायत दोषी हैं। उनको भारी दंड मिलेगा। संत सतगुरु तो हमेशा अपने जीवों के साथ हैं। राधास्वामी दयाल तो हर ऐसे व्यक्ति मदद करेंगे, ऊंचे स्थान पर पहुंच जाएंगे, जिनके हृदय में सच्ची लगन है अपने जीव का सच्चा उद्धार कराने की। जो लोग माया के पदार्थों की तलाश में रहते हैं, यही घर चाहते हैं, यहीं पर रहना चाहते हैं, वो तीर्थ को जाते हैं सिर्फ उद्देश्य की पूर्ति के लिए, मूर्तियों की पूजा करते हैं तो इच्छापूर्ति के लिए, उनसे कोई सरोकार नहीं है। करोड़ों लोगों में से कितने लोग होंगे जिनके हृदय में सच्ची लाग अपनी मुक्ति की होगी? बहुत थोड़े। ऐसे लोगों के लिए ही स्वामी जी महाराज ने अपने बचन में मंदिर-मूरत का खंडन करके सच्चे सतसंगी या सदमार्ग को मानने वालों के संग की सलाह दी है ताकि इस भरम जाल से बचाया जा सके और इसीलिए सतसंग आम कर दिया। अगर आप सतसंग में आकर भी वही दुनिया की चीज चाहते हैं, दुनिया की मान बड़ाई चाहें, बेटा चाहें, बेटी चाहे और किसी किस्म के दुनिया के सुखों की प्राप्ति की चाह लेकर आते हैं तो वह आप की चाह सही और दुरुस्त नहीं है। पहले चाह अपने उद्धार की जिनको है, उन्हीं को राधास्वामी संगत से लाभ प्राप्त होगा। इसलिए उसके साथ वक्त के गुरु की महिमा रखी गई है कि आप अपनी और बातें भी उनसे कह सकते हैं, उनसे सलाह ले सकते हैं, वो तो हरदम आपकी हर तरह की मदद करने के लिए तैयार हैं।
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