लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मदरसा शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और अहम बदलाव करने जा रही है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, अब राज्य के मदरसों में केवल 12वीं कक्षा तक ही शिक्षा दी जा सकेगी। मदरसों में संचालित होने वाले ‘कामिल’ (ग्रेजुएशन) और ‘फाजिल’ (पोस्ट ग्रेजुएशन) स्तर की उच्च शिक्षा पर रोक लगाने के प्रस्ताव को मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप है फैसला
सरकार का तर्क है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बिल्कुल अनुरूप लिया जा रहा है। इसके लिए ‘उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम, 2004’ में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि कैबिनेट से इस पर मुहर लग जाती है, तो मदरसों में इन उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों का संचालन आधिकारिक रूप से बंद हो जाएगा।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इस संबंध में कहा है कि पहले से जारी की जा चुकी कामिल और फाजिल की डिग्रियों को भी नियमानुसार निरस्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, क्योंकि यूजीसी के दायरे से बाहर रहकर ऐसी डिग्रियां प्रदान करना मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुकूल नहीं है।
कैबिनेट बैठक में अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली इस कैबिनेट बैठक में कुल 21 प्रस्तावों पर विचार किया जाना है। इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक के अनुपूरक बजट प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है।
गौरतलब है कि अब तक ‘कामिल’ पाठ्यक्रम को स्नातक (बीए) और ‘फाजिल’ को स्नातकोत्तर (एमए) के समकक्ष मान्यता प्राप्त थी। तीन वर्ष के कामिल और दो वर्ष के फाजिल पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से अरबी, फारसी और दीनियात विषयों की पढ़ाई कराई जाती थी।
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