लखनऊ: नवाबों के शहर लखनऊ में शनिवार को ईद-उल-फितर का त्योहार पारंपरिक हर्षोल्लास और अकीदत के साथ मनाया गया। ऐशबाग स्थित ऐतिहासिक ईदगाह में सुबह से ही नमाजियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कड़े सुरक्षा इंतजामों और ‘हाई अलर्ट’ के बीच करीब 50 से 60 हजार लोगों ने एक साथ नमाज अदा कर देश की तरक्की, खुशहाली और अमन-चैन की दुआ मांगी। इस दौरान ईदगाह का नजारा न केवल धार्मिक बल्कि ‘सियासी एकजुटता’ का केंद्र भी बना रहा।
एक मंच पर जुटे धुर विरोधी दल
ईद के इस मुबारक मौके पर उत्तर प्रदेश की राजनीति के दिग्गज चेहरे एक साथ नजर आए। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, भाजपा के राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा और वरिष्ठ भाजपा नेता रीता बहुगुणा जोशी ने ऐशबाग पहुंचकर नमाजियों को गले मिलकर मुबारकबाद दी। चुनावी सरगर्मियों और वैचारिक मतभेदों से इतर, नेताओं का यह मेल-जोल शहर की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की एक सुखद तस्वीर पेश कर गया।
अनुशासन और अकीदत का संगम
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने नमाज का नेतृत्व किया। उन्होंने पहले ही अपील की थी कि नमाज सड़कों पर न पढ़ी जाए और सरकारी गाइडलाइन का पालन हो। ईदगाह के भीतर जगह कम पड़ने के कारण हजारों नमाजी कतारों और गलियारों में खड़े होकर नमाज अदा करते दिखे, लेकिन पूरा कार्यक्रम बेहद अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
लखनऊ प्रशासन ने त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात की थी। ड्रोन और CCTV से संवेदनशील इलाकों और पुराने लखनऊ की निगरानी की गई। नमाजियों की सुविधा के लिए शहर के 27 प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू रहा। साथ ही भ्रामक खबरों को रोकने के लिए इंटरनेट मीडिया पर प्रशासन की पैनी नजर रही।
धर्मगुरुओं और प्रशासन के आपसी सहयोग से लखनऊ में ईद का पर्व न केवल शांतिपूर्ण रहा, बल्कि भाईचारे और सौहार्द का एक बड़ा संदेश देकर गया।
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