नई दिल्ली। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सोमवार को लोकसभा में विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत की गौरवगाथा को याद किया और कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरक शक्ति रहा है। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना और कांग्रेस पर चुन-चुनकर हमला बोला।
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि नेहरू मुस्लिम लीग और जिन्ना के दबाव में वंदे मातरम् के हिस्से काटने को तैयार हो गए, जिसे कांग्रेस ने “सामाजिक सद्भाव” के नाम पर स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वंदे मातरम् पर झुकी, इसलिए आगे चलकर उसे देश के बंटवारे तक झुकना पड़ा।
“जिन्ना के विरोध पर नेहरू सहमत हो गए”—पीएम मोदी का आरोप
प्रधानमंत्री ने लोकसभा में दावा किया कि जब जिन्ना ने वंदे मातरम् का विरोध किया, तो नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखकर कहा कि वंदे मातरम् की आनंद मठ पृष्ठभूमि मुसलमानों को “इरिटेट” कर सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने इसी दबाव में वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए और इसे विवादों में घसीटा गया।
इमरजेंसी, कांग्रेस और ‘वंदे मातरम्’ की धार
पीएम मोदी ने इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल (Emergency) का जिक्र करते हुए कहा कि जब वंदे मातरम् 100वीं सालगिरह मना रहा था, तब देश का संविधान कुचला जा रहा था। उन्होंने कहा “इमरजेंसी में ‘वंदे मातरम्’ ने ही देश को खड़ा रखने की ताकत दी थी।”
महात्मा गांधी का हवाला: “गांधी जी को दिखता था राष्ट्रीय गान”
पीएम मोदी ने अपने भाषण में महात्मा गांधी के 1905 के लेख का उल्लेख किया। गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में प्रकाशित पत्रिका इंडियन ओपिनियन में लिखा था “वंदे मातरम् बंगाल में अत्यंत लोकप्रिय है।”, “यह हमारा नेशनल एंथम बन गया है।”, “यह अन्य किसी भी राष्ट्रगीत से अधिक मधुर है और देशभक्ति की भावना जगाता है।”
पीएम मोदी ने सवाल उठाया “जब बापू को वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत दिखता था, तो फिर पिछली सदी में इसके साथ इतना अन्याय क्यों हुआ?” उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को जानना चाहिए कि किन परिस्थितियों में वंदे मातरम् को विवादों में धकेला गया।
“150 साल बाद—वंदे मातरम् की शान फिर से स्थापित करने का समय”
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब वंदे मातरम् 150वीं वर्षगांठ मना रहा है, तो यह समय है इसकी प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने का। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने 1947 में देश को आज़ादी दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई और अब इसकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जाना चाहिए।
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