पाकिस्तान में हिंदुओं और सिखों के बाद अब ईसाई समुदाय भी कट्टरपंथियों के निशाने पर है। रविवार को पेशावर में बाइक सवार दो लोगों ने शहर के सबसे बड़े चर्च के प्रीस्ट यानी पादरी की गोली मारकर हत्या कर दी। उनके साथी प्रीस्ट गंभीर रूप से घायल है। कत्ल को अंजाम देने के बाद दोनों हमलावर बड़ी आसानी से शहर के मेन रोड से भाग निकले।
चर्च ऑफ पाकिस्तान के सीनियर बिशप आजाद मशाल ने घटना की निंदा करते हुए सीधे इमरान खान सरकार को निशाने पर लिया। आजाद ने कहा- इमरान सरकार ईसाई समुदाय के लोगों की हिफाजत करने में नाकाम रही है।
कार में थे दोनों प्रीस्ट
CNN के पाकिस्तान में मौजूद रिपोर्टर के मुताबिक घटना रविवार की है। पास्टर विलियम सिराज और उनके साथी प्रीस्ट फादर नसीम पेशावर के मुख्य बाजार से गुजर रहे थे। इसी दौरान पीछे से एक बाइक पर दो लोग आए। इन्होंने कार के सामने बाइक खड़ी कर दी। इसके बाद बाइक पर पीछे बैठा शख्स उतरा और उसने बेहद करीब से दोनों पादरियों पर गोलियां चलाईं। विलियम सिराज की मौके पर ही मौत हो गई। नसीम को हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। उनकी हालत गंभीर बताई गई है।
पेशावर में 2013 में एक चर्च पर सुसाइड बम अटैक हुआ था और इसमें कई लोग मारे गए थे। इसकी साजिश रचने वाले लोगों को अब तक नहीं पकड़ा जा सका है। अब तक किसी संगठन ने रविवार को हुए हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
किस पर शक
पाकिस्तान में ईसाइयों के संगठन ने घटना पर शोक जताया। इसके प्रमुख सीनियर बिशप आजाद मशाल ने कहा- हम चाहते हैं कि पाकिस्तान सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और हमें इंसाफ दिलाए। सरकार अब तक अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में नाकाम रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पेशावर ऐसा शहर है जिसकी सीमाएं अफगानिस्तान से लगती हैं और यहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP का दबदबा है। हाल के दिनों में TTP ने सिक्योरिटी फोर्सेस पर भी काफी हमले किए हैं। पिछले महीने पाकिस्तान सरकार और TTP के बीच सीजफायर टूट गया था। ये सिर्फ एक महीने ही चल पाया था।
पुलिस अब तक खामोश
इस मामले में खास बात यह है कि घटना पेशावर के मेन बाजार की तरफ जाने वाली सड़क पर हुई। इस दौरान वहां काफी चहलपहल और कुछ दूरी पर पुलिस भी मौजूद थी। लेकिन, इसके बावजूद हमलावर भागने में कामयाब रहे। जब ईसाई संगठन के लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के लिए उतरे तो उन्हें रोकने की कोशिश की गई। पुलिस ने अब तक इस मामले में जांच पर भी कोई बयान नहीं दिया है। विदेशी मीडिया में इस घटना को प्रमुखता से जगह दी गई है।
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