आगरा में स्कूली वैन संचालकों की हड़ताल से अभिभावक परेशान, स्कूलों के बाहर लगा लंबा जाम

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आगरा। आगरा में स्कूली बच्चों के परिवहन को लेकर प्रशासन और वैन संचालकों के बीच टकराव चरम पर पहुँच गया है। आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त चेकिंग अभियान के विरोध में वैन संचालकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुन लिया है। पिछले दो दिनों से शहर के कई नामी स्कूलों की वैन सेवाएं पूरी तरह ठप हैं, जिसका खामियाजा अब अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है।

​आठ बच्चों की सीमा से उपजा विवाद

प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, स्कूली वैनों में आठ से अधिक बच्चों को बैठाना नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। आरटीओ विभाग के इस आदेश के बाद कई वैन संचालकों ने भारी जुर्माने के डर से अपनी गाड़ियां सड़कों से हटा ली हैं। इस अचानक आई हड़ताल का असर सेंट पीटर्स, सेंट पैट्रिक्स और सेंट फ्रांसिस जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के छात्रों पर सबसे अधिक पड़ा है, जो पूरी तरह से निजी वैन सेवाओं पर निर्भर थे।

​अभिभावकों की दिनचर्या हुई अस्त-व्यस्त

वैन सेवा बंद होने से आम जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है। विशेष रूप से कामकाजी अभिभावकों के लिए यह स्थिति किसी संकट से कम नहीं है। सुबह के समय दफ्तर और व्यापारिक कामकाज के बीच बच्चों को निजी वाहनों से स्कूल छोड़ने की मजबूरी ने हजारों परिवारों की दिनचर्या को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। लंबी दूरी तय करने और छोटे बच्चों को खुद स्कूल लाने-ले जाने के कारण अभिभावक काफी मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं।

​शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का भारी दबाव

स्कूलों के बाहर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सुबह और छुट्टी के समय सेंट पीटर्स, सेंट पैट्रिक्स और सेंट फ्रांसिस जैसे स्कूलों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। बड़ी संख्या में निजी कारों और दोपहिया वाहनों के स्कूल पहुँचने से जाम की स्थिति आम हो गई है, जिससे ट्रैफिक पुलिस को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थानीय प्रशासन और यातायात विभाग को जाम को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने पड़ रहे हैं।

​सुरक्षा और व्यवहारिकता के बीच फंसी बहस

प्रशासन का कड़ा रुख है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना कतई स्वीकार्य नहीं है। दूसरी ओर, वैन संचालकों का कहना है कि नियमों का पालन करने पर उनका संचालन खर्च इतना बढ़ जाएगा कि व्यवसाय करना मुश्किल होगा। अब सारा दारोमदार प्रशासन और वैन संचालकों के बीच होने वाली वार्ता पर है, ताकि बीच का कोई रास्ता निकल सके और अभिभावकों व विद्यार्थियों को इस असुविधा से जल्द मुक्ति मिल सके।

Dr. Bhanu Pratap Singh