आगरा विश्वविद्यालय में ओपन क्लास: कुलपति प्रोफेसर आशुरानी ने दी छात्रों की सोच को नई उड़ान, प्रो. लवकुश मिश्रा की नई पुस्तक का लोकार्पण
Live Story Time, Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat. डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के संस्कृति भवन में ओपन क्लास का शुभारंभ हुआ। कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने इसकी शुरुआत की। छात्रों को सिलेबस से बाहर ज्ञान मिलेगा। मुख्य विषय स्वदेशी और स्वावलंबन रहा। चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रमोद सिंह चौहान ने व्याख्यान दिया। एक किताब का विमोचन भी हुआ।
ओपन क्लास की अवधारणा
विश्वविद्यालय में खुली कक्षाएं चलेंगी। छात्र पाठ्यक्रम से आगे बढ़ेंगे। विभिन्न विषयों पर व्याख्यान होंगे। सोच का दायरा बढ़ेगा। जीवन में सफलता मिलेगी। कुलपति छात्रों से मिलीं। उनकी चुनौतियां जानीं। भविष्य की योजनाएं सुनीं।
कुलपति का संदेश
प्रोफेसर आशु रानी ने कहा। देश को विकसित बनाना है। नौकरी लेने वाले न बनें। नौकरी देने वाले बनें। प्रयास करें। छात्रों को प्रेरित किया। सामाजिक ज्ञान पर जोर दिया।
व्याख्यान का विषय
आज का विषय स्वदेशी, स्वावलंबन और समृद्धि था। मुख्य वक्ता प्रमोद सिंह चौहान थे। उन्होंने इतिहास से उदाहरण दिए। चुनौतियां बताईं। समाधान समझाए। स्वदेशी अपनाने पर बल दिया।
इतिहास की सीख
ईस्ट इंडिया कंपनी ने आर्थिक गुलामी की। राजनीतिक बंधन डाले। इतिहास से सबक लें। स्वावलंबी बनें। समृद्धि बढ़े। विदेश में रोजगार न तलाशें। देश में रहें।
उद्योगों का पतन
पहले कपड़ा उद्योग उन्नत था। अन्य उद्योग मजबूत थे। अंग्रेजों ने नष्ट किया। रोजगार कम हुआ। कला गिरी। अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। बंगाल की साड़ी का उदाहरण दिया गया। महीन कारीगरी का ज़िक्र हुआ।
भारत की क्षमता
प्रतिभा की कमी नहीं। भारतीयों ने विदेशी कंपनियां समृद्ध कीं। अब भारत की बारी है। वैचारिक ऊँचाई दें। विश्व गुरु बनें। विकास की राह चुनें।

किताब का विमोचन
प्रोफेसर लवकुश मिश्रा की किताब आई। नाम Introduction to Tourism Studies है। निखिल प्रकाशन से छपी है। विमोचन हुआ। सरल भाषा में है। सस्ती है। छात्र खरीद सकते हैं। पर्यटन पर यह उपयोगी है।
खुली कक्षाओं का लाभ
प्रोफेसर मिश्रा ने कहा। छात्र आउट-ऑफ-बॉक्स सोचेंगे। भविष्य बनेगा। सहायक होगी। पर्यटन अध्ययन आसान होगा।
कार्यक्रम का संचालन
डॉ. वाई. अपर्णा ने संचालन किया। अमित साहू ने धन्यवाद दिया। फैकल्टी सदस्य उपस्थित थे। साक्षी तिवारी, विभा माथुर, डॉ. अंजलि कुमारी, रंजीत सिंह, कुलदीप यादव, नितिन आदि मौजूद रहे।
छात्राओं में तनिष्का, इशिता, यशिका प्रमुख रहीं। छात्रों में पवन, कशिश, सितारा, विनीत भी आए। अन्य विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।
ओपन क्लास छात्रों की सोच को नई दिशा देगा।
संपादकीय: प्रोफेसर आशु रानी का दूरदर्शी नेतृत्व
शिक्षा में कुछ लोग बदलाव की मशाल जलाते हैं। प्रोफेसर आशु रानी उनमें से एक हैं। उन्होंने ओपन क्लास की परिकल्पना दी। यह कदम समयोचित है।
परंपरागत सीमाओं को तोड़कर उन्होंने छात्रों को व्यापक ज्ञान दिया। सिलेबस से परे व्याख्यान प्रेरक हैं। यह छात्रों की सोच को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।
उनका संवादशीलरूप यह दर्शाता है कि वे केवल प्रशासक नहीं हैं। वे मार्गदर्शक भी हैं। उनका कहना — नौकरी लेने वाले न बनो, नौकरी देने वाले बनो — सार्थक है।
स्वदेशी और स्वावलंबन पर व्याख्यान राष्ट्रीय चेतना जगाते हैं। इतिहास की गलतियों से सीखना आवश्यक है। यह पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
पुस्तक विमोचन जैसे आयोजन ज्ञान प्रसार को बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उन्होंने व्यावहारिक सीख दी। इससे विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।
प्रोफेसर रानी का यह नेतृत्व विश्वविद्यालय को नई दिशा दे रहा है। उनकी पहल से छात्र प्रेरित होंगे। यह कदम देश की प्रगति में सहायक होगा।
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