Dr Bhanu Pratap Singh
Agra, Uttar Pradesh, India. मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा मंडल आरपी शर्मा का कहना है कि सभी शिक्षक निश्चिंत होकर पढ़ाएं। कोई समस्या है तो फोन करके या वॉट्सअप पर अवगत करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक विद्यालयों की मनमानी नहीं चलेगी। व्यक्तिगत संबंधों को रिसोर्स के रूप में प्रयोग करेंगे। श्री शर्मा सहारनपुर से स्थानांतिरत होकर यहां आए हैं। उनके कार्यकाल में सहारनपुर मंडल प्रथम स्थान पर रहा। वे इससे पहले आगरा में सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा और उप निदेशक शिक्षा भी रह चुके हैं। श्री शर्मा ने पंचकुइयां स्थित कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के बाद ‘जनसंदेश टाइम्स’ से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंशः
आपकी प्राथमिकता क्या है?
RP Sharma: सभी साथी लोग हैं। इनकी कोई शिकायत है तो उसे दूर करना है ताकि वे निश्चिंत होकर अपना काम कर सकें। जब तक निश्चिंत नहीं रहेंगे तो पढ़ाई में मन नहीं लगेगा। पढ़ाई ठीक से नहीं करेंगे तो बच्चों पर असर पड़ेगा। शिक्षकों को कोई समस्या है तो हमारे नम्बर बात करें। अब तो वॉट्सअप जैसी सुविधा है, उस पर बता सकते हैं। किसी को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और बढ़ाना चाहिए।
व्यक्तिगत संबंध काम पर असर नहीं डालेंगे क्या?
RP Sharma: व्यक्तिगत संबंधों को सकारात्मक लेना चाहिए। जैसे कि आप मुझे जानते हैं तो आप मुझे कुछ अच्छी चीजें बताएंगे। ऐसी चीजें बताएंगे जो किसी अन्य को न बता सकें। फिर उसका समाधान जल्दी कर सकते हैं। संबंधों का अर्थ है मेरे पास अधिक स्रोत हैं। अधिक स्रोतों से जानकारी मिलेगी कि कहां क्या खराब है और क्या ठीक करना है। इस तरह हम संबंधों को रिसोर्स के रूप में प्रयोग करेंगे।
अल्पसंख्यक विद्यालय मनमानी करते हैं, उन पर अंकुश कैसे लगाएंगे?
RP Sharma: अल्पसंख्यक विद्यालयों को चलाने के लिए निश्चित नियम हैं, जिसके अंतर्गत हमें अधिकार प्राप्त हैं। अगर कोई मनमानी कर रहे हैं तो निश्चित रूप से अंकुश लगाया जाएगा। दो तरह के अल्पसंख्यक विद्यालय हैं- स्ववित्त पोषित और सहायता प्राप्त। स्ववित्तपोषित को कुछ विशेष सुविधाएं हैं लेकिन सहायता प्राप्त विद्यालयों पर पूरा अधिकार होता है।
जिला विद्यालय निरीक्षक ने सुनाया किस्सा
इस बीच जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार ने आरपी शर्मा के बार में एक किस्सा सुनाया- लखनऊ में सर्वशिक्षा अभियान की बैठक चल रही थी। चार आईएएस बैठक ले रहे थे। सब दबंग अफसर थे। मिड—डे-मील की समीक्षा हो रही थी। उस समय सर (आरपी शर्मा) लखनऊ के एडी बेसिक थे। कोई समस्या नहीं थी लेकिन कामरान रिजवी बार-बार कह रहे थे कि कार्रवाई हो जाएगी। इस पर सर (आरपी शर्मा) एकाएक खड़े हुए और कहा- पहले कार्रवाई करिए। हम लोग मन बना चुके थे कि कुछ कार्रवाई हुई तो विरोध करेंगे। सर के प्रति इतना स्नेह था। इस किस्से को आरपी शर्मा ने आगे बढ़ाते हुए कहा- असल में वे कह रहे थे कि बीएसए के खिलाफ कार्रवाई कराकर अवगत कराइए। चार्जशीट बनाइए कि ये बिलकुल काम नहीं कर रहे हैं, गलत सूचनाएं दे रहे हैं। मैंने कहा—आप बीएसए को सस्पेंड कर दीजिए और मुझे भी लेकिन पहले यह बताइए कि आपने एक साल में क्या किया है?
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