गांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिख मर्ज के बीच बढ़ती आपसी समझ और सहजता ने कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है। दोनों नेताओं की एक अनौपचारिक तस्वीर सामने आई है, जिसे ‘कार डिप्लोमेसी’ का नाम दिया जा रहा है। यह तस्वीर न केवल भारत–जर्मनी के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को रेखांकित करती है, बल्कि दोनों नेताओं के व्यक्तिगत रिश्तों में आई गर्मजोशी को भी दर्शाती है। इस अनौपचारिक संवाद ने द्विपक्षीय रिश्तों को एक नया आयाम दिया है।
गुजरात से हुई यात्रा की शुरुआत, गांधी को दी श्रद्धांजलि
जर्मन चांसलर के रूप में अपने पहले भारत दौरे पर आए मर्ज का स्वागत प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में किया गया। आधिकारिक बैठकों से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें भारतीय संस्कृति और विरासत से परिचित कराया। अपनी यात्रा की शुरुआत करते हुए चांसलर मर्ज ने साबरमती आश्रम पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी के विचार आज के वैश्विक परिदृश्य में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।
व्यापार और अर्थव्यवस्था पर हुआ गहन मंथन
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद दोनों नेताओं का फोकस व्यापार और आर्थिक सहयोग पर रहा। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने भारत और जर्मनी के प्रमुख उद्योगपतियों और शीर्ष कंपनियों के सीईओ के साथ अहम बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा नए निवेश अवसर तलाशने पर चर्चा हुई।
भारत में जर्मन निवेश को लेकर भरोसा
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में जर्मन निवेश की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जर्मनी की लगभग दो हजार कंपनियां भारत में सक्रिय हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और कारोबारी माहौल पर उनके भरोसे को दर्शाता है। दोनों नेताओं ने भविष्य में तकनीक, निर्माण और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
इस मुलाकात को भारत–जर्मनी संबंधों में विश्वास, साझेदारी और भविष्य की साझा दृष्टि को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
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