माया सभ्यता की चर्चा साल 2011-12 में इसके कैलेंडर के कारण भविष्यवाणी की गई थी कि साल 2012 में दुनिया का विनाश हो जाएगा. हालांकि ऐसा हुआ तो नहीं पर इस सभ्यता को लेकर आज भी खूब चर्चा होती है. कभी इस सभ्यता के लाखों लोग इस धरती पर रहा करते थे, लेकिन फिर एक समय आया कि वो सभी विलुप्त हो गए. अब वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने इसका पता लगा लिया है कि माया सभ्यता के लोग आखिर क्यों विलुप्त हो गए?
माना जाता है कि माया सभ्यता के लोग ग्वाटेमाला, मेक्सिको, होंडुरास और यूकाटन प्रायद्वीप में रहा करते थे. यूकाटन में प्राचीन माया शहर के खंडहर भी मौजूद हैं, जिसे चिचेन इट्जा के नाम से जाना जाता है. कहते हैं कि 1500 ईसा पूर्व में इस महान सभ्यता की शुरुआत हुई थी और 16वीं शताब्दी में ये सभ्यता पूरी तरह से विलुप्त हो गई, पर ये सभ्यता कैसे विलुप्त हुई, इसको लेकर तरह-तरह के दावे किए जाते हैं. कुछ लोग मानते हैं कि युद्ध और महामारी की वजह से माया सभ्यता का अंत हो गया तो कुछ कहते हैं कि उनके ठिकानों पर एलियंस का हमला हुआ था.
ऐसे हुआ माया सभ्यता का विनाश
हालांकि अब वैज्ञानिक कह रहे हैं कि सूखा पड़ने की वजह से इस सभ्यता का विनाश हुआ था. लैडबाइबल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अध्ययन में पाया गया है कि खेती के लिए रास्ता बनाने और खूबसूरत संरचनाएं बनाने के लिए ईंधन के रूप में बहुत सारे पेड़ों को काट दिया गया था, जिसके कारण सौर विकिरण को अवशोषित करने की भूमि की क्षमता कम हो गई. इसका मतलब था कि कम पानी का वाष्पीकरण हुआ, जिसका मतलब है कि एक सदी के दौरान कम बादल बने और 5-15 फीसदी कम बारिश हुई.
खाने के पड़ गए थे लाले
कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, कम बारिश होने की वजह से फसलों को नुकसान पहुंचा और व्यापार की भी कमी हो गई. अंत में ऐसा हुआ कि उन्हें खाने के लाले पड़ गए और उनका अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया और फिर धीरे-धीरे ये सभ्यता पूरी तरह से विलुप्त हो गई.
– एजेंसी
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