Agra, Uttar Pradesh, India. वर्धमान महावीर स्वामी जैन मंदिर दादाबाड़ी में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण का लाडू साध्वी श्री वैराग्य निधि महाराज साहब की निश्रा में चढ़ाया गया। सर्वप्रथम वर्धमान महावीर स्वामी जैन मंदिर के द्वार का उद्घाटन मंत्रोच्चार के मध्य किया गया। उपरांत तलघर वर्धमान महावीर स्वामी मंदिर मंदिर एवं कालिकुंड पार्श्वनाथ 24 जिनालय में भी परमात्मा महावीर के निर्वाण का लाडू चढ़ाया गया। परमात्मा महावीर स्वामी के प्रथम गणधर गौतम स्वामी के केवल ज्ञान प्राप्ति भी आज ही के दिन हुई थी।
इस अवसर पर साध्वी श्री वैराग्य निधि जी महाराज सामने गौतम रास को बड़े ही सुंदर शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि कार्तिक बदी अमावस्या की अर्द्धरात्रि में प्रभु महावीर मोक्ष पधारे। भगवान महावीर स्वामी के प्रथम शिष्य गौतम स्वामी विनम्रता की प्रतिमूर्ति थे। उनका रोम-रोम प्रभु वीर की आज्ञा के लिए समर्पित था। गौतम स्वामी ने जब भगवन के निर्वाण को जाना तो वे विरह की व्यथा से पीड़ित हो गए। जब बोध प्रगटा कि मेरी ही एकपक्षीय प्रीति थी तो गौतम स्वामी का अल्पराग क्षीण हो गया और कैवल्य को उपलब्ध हो गए। आज नया वीरसंवत, नववर्ष का शुभागमन पुनः जाग्रति का संदेश लेकर आया है। आत्म जागरण का शंखनाद करें।

आगरा विकास मंच एवं जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्री संघ के अध्यक्ष राजकुमार जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि परमात्मा महावीर के समान हमें निर्वाण तो प्राप्त नहीं हो सकता परंतु हम राग द्वेष को कम करके अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।
कार्यक्रम में चातुर्मास समिति के प्रमुख सुनील कुमार जैन, विमल जैन, बृजेंद्र लोढ़ा, अतिन वैद, दुष्यंत जैन, विनय, मनीष वागचर, प्रवीण जैन, अजय, संजय, शरद चौरड़िया, अंकित पाटनी, निशांत वैद आदि की उपस्थिति उल्लेखीय रही। आज के कार्यक्रम के लाभार्थी विनीत एवं कार्तिक थे। स्वल्पाहार का आयोजन श्री संघ की ओर से किया गया।
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