उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं के साथ कथित तौर पर पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट और अमानवीय व्यवहार किए जाने का गंभीर आरोप लगा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
हाल ही में कार्यभार संभालने वाले नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बीबीजीटीएस मूर्ति ने अपनी कुर्सी संभालते ही तत्काल प्रभाव से एक इंस्पेक्टर समेत कुल 8 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह को सौंप दी गई है।
शासन स्तर पर हुआ था बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
उल्लेखनीय है कि इस घटना के तूल पकड़ने से ठीक पहले, गुरुवार देर रात शासन स्तर पर एक बड़ा कदम उठाते हुए 9 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए थे। इसी प्रशासनिक फेरबदल के तहत मेरठ के तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय को उनके पद से हटाकर सीधे लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था। मामला तूल पकड़ता देख मेरठ के एडीजी भानु भास्कर ने तुरंत एक्शन लेते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच सहारनपुर के डीआईजी को निर्देशित कर दी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सपा नेताओं ने सुनाई अपनी आपबीती
शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के नेता दिग्विजय भाटी और जिला अध्यक्ष मोहित जाटव ने मीडिया के सामने आकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान दिग्विजय भाटी की आंख पर गंभीर चोट के निशान और पट्टी बंधी हुई साफ नजर आ रही थी। उन्होंने अपनी चोटें दिखाते हुए दावा किया कि उन्हें और मोहित को पहले एसएसपी के आधिकारिक चैंबर के भीतर बेरहमी से पीटा गया और उसके बाद उन्हें पुलिस लाइंस स्थित एसओजी कार्यालय ले जाया गया।
दिग्विजय का आरोप है कि वहां भी बंद कमरे में उनके साथ अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी गईं। उन्होंने यह तक दावा किया कि जब वे मारपीट से बेहोश हो जाते थे, तो पुलिसकर्मी उन्हें पानी डालकर होश में लाते थे और फिर दोबारा पीटना शुरू कर देते थे। उनके मुताबिक, रात करीब दो बजे सपा विधायक अतुल प्रधान के वहां पहुंचने के बाद ही उन्हें पुलिस की कैद से छोड़ा गया।
‘40 रुपये का कुर्ता पहनकर नेता बनते हो?’
अपनी आपबीती साझा करते हुए दिग्विजय भाटी ने बताया कि बीते 19 अगस्त को वे अपने जिलाध्यक्ष मोहित जाटव के साथ एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने उनके कार्यालय गए थे। उनका उद्देश्य हाल ही में ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा जेल भेजे गए 8-10 लोगों के संबंध में अपनी बात रखना था।
भाटी का आरोप है कि जब उन्होंने एसएसपी के सामने अपनी बात रखनी चाही, तो अधिकारी उन पर भड़क गए। आरोप है कि इसी दौरान उनके खिलाफ बेहद अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और तंज कसते हुए कहा गया कि ‘40 रुपये का कुर्ता-पायजामा पहनकर नेता बन जाते हो, हमसे टकराओगे?’ जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन्हें कथित तौर पर चैंबर के अंदर ले जाकर पीटा गया। इसके बाद सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को दोनों को एसओजी कार्यालय ले जाने का निर्देश दिया गया, जहां उनके हाथ-पैर बांधकर डंडों से जमकर पिटाई की गई।
गाना बजाकर प्रताड़ित करने का भी आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय ने पुलिसकर्मियों के रवैये को अमानवीय बताते हुए एक और सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रताड़ना के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके मोबाइल पर एक फिल्मी गाना ‘चोली के पीछे क्या है’ बजाया और उन दोनों को उस पर नाचने के लिए मजबूर किया।
भाटी का कहना था कि मारपीट की वजह से उनकी शारीरिक हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि वे अपने पैरों पर खड़े तक नहीं हो पा रहे थे, इसके बावजूद उन पर नाचने का दबाव बनाया गया। इस दौरान पुलिसकर्मी उन पर हंसते रहे और उनके गिड़गिड़ाने तथा हाथ जोड़ने के बावजूद उन्होंने रहम नहीं किया। साथ ही उन्हें यह सख्त धमकी भी दी गई थी कि यदि इस घटना की भनक मीडिया तक पहुंची, तो उनके साथ और भी बुरा सलूक किया जाएगा।
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