रामपुर। सपा नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सपा सरकार जाने के बाद से वह कानूनी शिकंजे में बुरी तरह जकड़ चुके हैं। 17 माह में उनके नौ मुकदमों में फैसला आ चुका है, जिसमें छह में सजा सुनाई गई। तीन मामलों में बरी हुए हैं।
आजम खान पर वर्ष 2019 में ताबड़तोड़ 84 मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें ज्यादातर न्यायालय में विचाराधीन हैं। नौ मामलों में फैसला आ चुका है। इनमें एक मामला मुरादाबाद का है। 13 फरवरी 2023 को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट मुरादाबाद ने छजलैट में हाईवे जाम करने के आठ साल पुराने मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दो-दो साल की सजा सुनाई थी। इसमें अब्दुल्ला की विधायकी चली गई थी।
आठ मामले में रामपुर की अदालत में हुए फैसले
इसके अलावा अन्य आठ मामलों में रामपुर की अदालत से फैसले हुए। इनमें पहला फैसला 27 अक्टूबर 2022 को सुनाया गया था। यह मामला भड़काऊ भाषण का था, जो मिलक कोतवाली में दर्ज हुआ था। इसमें एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ उन्होंने एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में अपील की थी।
सजा के फैसले को सेशन में निरस्त कर दिया था। इसके बाद 15 जुलाई 2023 को भड़काऊ भाषण के एक दूसरे मामले में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने आजम खां को दो साल कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। यह सजा शहजादनगर थाने में दर्ज मुकदमे में हुई थी। इसमें सजा के खिलाफ उनकी अपील सेशन कोर्ट से खारिज हो चुकी है।
तीसरी बार सजा दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में हुई थी
तीसरी बार सजा दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में हुई थी। यह सजा भी एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में 18 अक्टूबर 2023 को हुई थी। इसमें आजम खां, उनकी पत्नी पूर्व सांसद डा. तजीन फात्मा और बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला को सात-सात साल कारावास की सजा हुई। तब से आजम खां सीतापुर और अब्दुल्ला हरदोई की जेल में सजा काट रहे हैं, जबकि तजीन फात्मा रामपुर जेल में बंद थी।
तजीन फात्मा जेल से रिहा
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद तजीन फात्मा बुधवार को ही जेल से रिहा हुई हैं। आजम खान के चौथे मामले में 23 दिसंबर 2023 को फैसला आया था। यह मामला पड़ोसी से मारपीट का था। इसमें आजम के अलावा उनके भाई सेवानिवृत्त इंजीनियर शरीफ खां, बेटे अब्दुल्ला और भतीजे बिलाल पुत्र शरीफ खां भी आरोपित थे। सभी को न्यायालय ने आरोप साबित न होने पर बरी किया था।
डूंगरपुर प्रकरण के चार मामलों में आया फैसला
इसके बाद आजम के खिलाफ डूंगरपुर प्रकरण के चार मामलों में फैसला आया। इनमें एक मामले में 31 जनवरी 2024 काे एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) ने फैसला सुनाया था। इसमें आजम खां के अलावा सेवानिवृत्त सीओ आले हसन, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष अजहर खां, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओमेंद्र चौहान समेत अन्य सपाई आरोपित थे। इस मामले में न्यायालय ने सभी को बरी कर दिया था।
18 मार्च 2024 को फिर डूंगरपुर प्रकरण के एक मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया, जिसमें आजम खां को सात साल कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि पूर्व सीओ सिटी आले हसन खां, पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर खां और बरकत अली ठेकेदार को पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई थी।
डूंगरपुर प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी सजा
इसके तीन दिन बाद 21 मार्च 2024 को डूंगरपुर के तीसरे मामले में फैसला आया, जिसमें आजम खान समेत सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया। अब गुरुवार को फिर डूंगरपुर प्रकरण में फैसला आया है, जिसमें उन्हें 10 साल के कारावास और 14 लाख रुपये जुर्माने की सजा हुई है। यह अब तक की सबसे बड़ी सजा है।
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