इनर रिंग रोड और लैंड पार्सल विवाद: आगरा में किसानों का आर-पार का मूड, प्रशासन से बोले- या तो जमीन लौटाओ या कानूनन मुआवजा दो

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आगरा। इनर रिंग रोड और लैंड पार्सल परियोजना से प्रभावित किसानों का सब्र अब जवाब देने लगा है। करीब 16 वर्षों से चले आ रहे भूमि अधिग्रहण विवाद को सुलझाने के लिए सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में प्रशासन और किसान नेताओं के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। इस दौरान किसानों ने एडीए (आगरा विकास प्राधिकरण) और भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और दो टूक शब्दों में अपनी जमीन वापस दिलाने या उचित मुआवजे की मांग की है।

​नियमों के उल्लंघन का आरोप

बैठक में किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया है। वहीं, मुकेश पाठक ने स्पष्ट किया कि इनर रिंग रोड की प्रक्रिया वर्ष 2009 में और लैंड पार्सल की 2011 में शुरू हुई थी, लेकिन अधिकारियों ने दोनों की धाराओं को नियमों के विपरीत एक साथ जोड़कर किसानों को भ्रमित किया। किसान नेता सोमवीर यादव ने तो यहां तक आरोप लगाया कि एडीए ने सरकार को गलत रिपोर्ट सौंपकर गुमराह करने का कुचक्र रचा है।

​प्रशासन ने दिया जाँच और समाधान का भरोसा

किसानों के तीखे विरोध को देखते हुए बैठक में मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट और भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि किसानों की मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जमीन वापसी अथवा कानून के अनुसार मुआवजे के विकल्प पर काम होगा। प्रशासन ने दो दिनों के भीतर नियमावली और संबंधित रिपोर्ट साझा करने का आश्वासन दिया है। जल्द ही इस मामले में सभी संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में एक और निर्णायक बैठक आयोजित की जाएगी।

पूर्व सैनिकों का भी मिला समर्थन

इस संघर्ष को अब एक नई धार मिल गई है। डॉ. महावीर सिंह चाहर ने चेतावनी दी है कि यदि 2000 से 2008 के बीच प्लॉट खरीदने वाले पूर्व सैनिकों और किसानों के साथ न्याय नहीं हुआ, तो वे संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।

बैठक में देवेंद्र सिंह, निरोतम शर्मा, रविंद्र सिंह और बंटू बघेल सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में ‘जमीन वापसी’ का नारा बुलंद किया।

​किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

Dr. Bhanu Pratap Singh