कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शनिवार को महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की स्वतंत्रता, उनके अधिकारों और पितृसत्तात्मक सोच जैसे गंभीर मुद्दों पर करीब एक घंटा 16 मिनट तक विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने समाज में महिलाओं की स्वतंत्र पहचान पर जोर देते हुए कई अहम बातें कहीं।
कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी महिला की पहचान उसके पिता, पति या बेटे के नाम से तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज में उसकी अपनी एक स्वतंत्र और मौलिक पहचान होती है। प्राचीन ग्रंथों और व्यवस्थाओं पर बात करते हुए उन्होंने मनुस्मृति का विशेष जिक्र किया और महिलाओं को पिता, पति या परिवार की संपत्ति मानने वाली दबी-कुचली सोच को बेहद शर्मनाक करार दिया।
गायिका नेहा सिंह राठौर ने साझा किया अपना अनुभव
इस कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने भी मंच पर अपने संघर्षों और अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि वह भोजपुरी में लोकगीत गाकर समाज और सरकार से जुड़े सवाल उठाती हैं, जिसके बदले उन्हें अक्सर भारी विरोध, अनगिनत तीखे सवालों और कई पुलिस एफआईआर (FIR) का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने एक वाकया साझा करते हुए कहा कि जब उनकी नई शादी हुई थी और उन्होंने चर्चित गाना ‘यूपी में काबा’ गाया था, तो उनके घर पर पुलिस पहुंच गई थी। उस वक्त उनके ससुराल वाले भी यही कहते थे कि “कैसी लड़की ब्याह लाए हो, रोज-रोज घर पर पुलिस आ रही है।”
नेहा ने आगे कहा कि आज के समय में महिलाओं की ट्रोलिंग भी बेहद अलग और नकारात्मक ढंग से की जाती है, जहां सीधे तौर पर उनके चरित्र पर कीचड़ उछाल दिया जाता है ताकि वे डरकर पीछे हट जाएं। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें पिछले 5 साल से लगातार गालियां दे रहे हैं और यह ताने कसते हैं कि तुम इतनी गालियां खाने के बाद भी आखिर सुधर क्यों नहीं रही हो?
राहुल गांधी का दिलचस्प जवाब और अल्पसंख्यकों का मुद्दा
नेहा सिंह राठौर की इस बात पर चुटकी लेते हुए और उनका हौसला बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने तुरंत जवाब दिया, “मुझे भी पिछले कई सालों से लगातार गालियां मिल रही हैं, मैं भी आज तक नहीं सुधरा।”
इसके बाद अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए नेहा ने देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति का जिक्र किया और कहा कि मौजूदा समय में देश के भीतर एक खास किस्म का नैरेटिव सेट कर दिया गया है। उन्होंने अपनी एक कविता की पंक्तियां साझा करते हुए कहा, “तुमसा कोई झूठा और बेईमान नहीं है, किसी एक की बपौती हिंदुस्तान नहीं है…”
छात्राओं को दी अपनी आवाज बुलंद करने की सलाह
कार्यक्रम के अंत में राहुल गांधी ने वहां मौजूद सभी छात्राओं और युवाओं से आह्वान किया कि वे किसी भी परिस्थिति से डरें नहीं, अपनी हक की आवाज को हमेशा बुलंद रखें और अपने अधिकारों के लिए डटकर लड़ें। इस विशेष संवाद सत्र के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद पांच अलग-अलग छात्राओं से सीधे बातचीत की और उनके सवालों के जवाब भी दिए।
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